
ट्रेड डील:: विपक्षी नेताओं का कोट्स
कृषि समझौते के विवरण की कमी से भारतीय किसानों के हितों पर सवाल उठ रहे हैं। सांसदों ने सरकार से स्पष्टता की मांग की है कि क्या समझौते में किसानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। टैरिफ में कटौती का स्वागत किया गया, लेकिन विपक्ष चिंतित है कि यह केवल नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते में क्या शामिल है और क्या भारतीय किसानों के हित सुरक्षित हैं या नहीं। संसद सत्र चल रहा है, इसके बावजूद सरकार ने सदन में कोई बयान नहीं दिया है, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है और स्थिति को भ्रमित करता है। - कनिमोई करुणानिधि, सांसद डीएमके --- टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को समझौते के सभी पहलुओं को स्पष्ट करना चाहिए। विपक्ष केवल यह जानना चाहता है कि समझौते में क्या है और क्या केवल नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट किसी संसदीय लोकतंत्र में पर्याप्त हैं। इस समझौते का ‘भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या कृषि के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं? - शशि थरूर, कांग्रेस सांसद --- टैरिफ में कटौती का स्वागत है, लेकिन यह समझौता सभी के लिए ‘विन-विन’ नहीं लगता।
अमेरिका की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि भारत अपने कृषि बाजार खोलेगा और रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, जो गंभीर सवाल खड़े करता है। वह समझौते के विस्तृत ब्योरा का इंतजार करेंगी, लेकिन अब तक जो जानकारी सामने आई है, वह भारतीय हितों के अनुरूप नहीं दिखती। - प्रियंका चतुर्वेदी, सांसद, शिवसेना (यूबीटी)

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