बिजली संयंत्रों पर 61 करोड़ का जुर्माना लगा
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर 61 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इन संयंत्रों को 5% बायोमास पैलेट्स का उपयोग करना अनिवार्य किया गया था।

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पराली से बने ईंधन का उपयोग नहीं करने वाले कोयला आधारित बिजली संयंत्रो पर 61 करोड़ रुपये का क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया है। ये बिजली संयंत्र दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। पराली की समस्या के समाधान और बेहतर उपयोग के लिए सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को पांच फीसदी बायोमास पैलेट्स या ब्रिकेट के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। ये पैलेट या ब्रिकेट पराली या अन्य कृषि अवशेष से बने होते हैं। आयोग के मुताबिक, इन वैज्ञानिक प्रावधानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अधिसूचित किया गया है।
इसके साथ ही नियमित अंतराल पर इनकी समीक्षा के भी निर्देश जारी किए गए थे, ताकि इनका पालन सुनिश्चित कराया जा सके।आयोग के मुताबिक, वर्ष 2024-25 की अवधि के दौरान इस नियम के अनुपालन की समीक्षा के दौरान पाया गया कि छह बिजली संयंत्रों में इसका पालन नहीं किया गया। इन उल्लंघनों पर कार्रवाई के लिए एक समिति का गठन किया गया था।
लेखक के बारे में
Sanjay Kushwahaशॉर्ट बायो : संजय कुशवाहा पिछले 21 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में पर्यावरण एवं वन्य जीव, मौसम, विधानसभा जैसी महत्वपूर्ण बीट की कवरेज कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभवः
संजय कुशवाहा पत्रकारिता और लेखन जगत में एक प्रतिष्ठित नाम है, जिन्हें पत्रकारिता में 21 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स समूह) में बतौर प्रमुख संवाददाता कार्यरत हैं। अपनी इस भूमिका के अंतर्गत वे दिल्ली में अलग-अलग विभागों की खबरें रिपोर्ट करते हैं। उनकी खबरों में पर्यावरण, वन्यजीव, मौसम और राजनीति के विविध रंगों को पहचाना जा सकता है।
करियर का सफरः
संजय कुशवाहा यूं तो कॉलेज के दिनों से विविध लेखन करते रहे और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपते भी रहे। वर्ष 2005 से दैनिक भास्कर सोनीपत, फिर अमर उजाला देहरादून और फिर दैनिक जागरण देहरादून में काम किया। वर्ष 2011 से हिन्दुस्तान दिल्ली में रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा हैं। लंबे पत्रकारीय जीवन में संजय कुशवाहा ने साहित्य, संस्कृति, नगर निगम से लेकर अपराध और राजनीति तक की कवरेज की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमिः
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई करने वाले संजय कुशवाहा को किताबें पढ़ना बेहद पसंद रहा है। खासतौर पर साहित्य, इतिहास और वन्य जीव के बारे में उन्होंने स्वतंत्र अध्ययन किया है।
पत्रकारीय दृष्टिकोणः
दिल्ली के पर्यावरण, प्रदूषण की समस्या, मौसम चक्र, वन्य जीवन, जंगल आदि की विशेष समझ। दिल्ली विधानसभा और कांग्रेस पार्टी की रिपोर्टिंग। स्थानीय निकाय एनडीएमसी की रिपोर्टिंग।
विशेषज्ञताः
साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण, वन एवं वन्य जीवन
राजनीति, विधानसभा, कांग्रेस पार्टी
स्थानीय निकाय एनडीएमसी, दिल्ली नगर निगम
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