न्यायपालिका के तकनीकी बदलाव में युवाओं की भूमिका : सीजेआई
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि युवा वकील और कानूनी पेशेवर न्यायपालिका में तकनीकी बदलाव के लिए प्रेरक हैं। ऑक्सफोर्ड यूनियन में एक संगोष्ठी में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी, जैसे कि एआई, मानवीय निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं बन सकती। युवा पेशेवर नई तकनीकों को तेजी से अपनाने में सक्षम हैं।

-कहा, इंसानी निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि युवा वकील, न्यायिक अधिकारी और कानूनी पेशेवर न्यायपालिका के तकनीकी बदलाव के लिए प्रेरक स्रोत हैं।ऑक्सफोर्ड यूनियन में आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सीजेआई ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी कभी भी मानवीय निर्णय क्षमता का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि भारत में कानून के क्षेत्र से जुड़े युवा, चाहे वे जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारी हों, सरकारी वकील हों या कॉरपोरेट संस्थाओं के कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे पेशेवर, सभी नई तकनीकों को अपनाने में बेहद सक्षम और तेज हैं।
सीजेआई ने कहा कि इन्हीं युवा प्रतिभाओं ने भारतीय न्यायपालिका में सुधारात्मक और तकनीक आधारित बदलावों को लागू करने में उत्साहजनक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रणाली अत्यधिक गति से विशाल कानूनी दस्तावेजों का विश्लेषण कर सकती है, प्रक्रियागत रुझानों की पहचान कर सकती है और प्रशासनिक स्तर पर मौजूद बाधाओं को सटीकता के साथ दूर कर सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई में कानून की आत्मा को जीवंत बनाने वाले तत्व- संवेदनशीलता, नैतिक विवेक और परिस्थितियों की गहरी समझ का अभाव है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


