नशीली दवाओं का दुरुपयोग चुपचाप घरों, समाज में घुलता है : सीजेआई
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग को समाज और देश के लिए खतरा बताया। उन्होंने नशे में फंसे युवाओं के पुनर्वास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग केवल आपराधिक नहीं, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सा समस्या है, और छात्रों को उचित मार्गदर्शन की जरूरत है।

पणजी, एजेंसी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए इसे समाज और देश के लिए खतरा बताया। उन्होंने नशे में फंसे युवाओं के पुनर्वास की जरूरत को लेकर कहा कि दया के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना दया अराजकता बन जाती है। सीजेआई गोवा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की ओर से नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर 30-दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग केवल आपराधिक नहीं, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सा समस्या है। नशे में फंसे छात्रों-युवाओं को उचित मार्गदर्शन की जरूरत है, न कि प्रतिशोधी बयानबाजी की।
सीजेआई ने इस बात पर खुशी जताई कि अभियान ने छात्रों से उन्हें नीचा दिखाए बिना बात की है। अभियान ने लोगों के मन में डर पैदा किए बिना उन्हें संवेदनशील बनाया है। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग शोर या चेतावनी के साथ नहीं आता है। यह चुपचाप हमारे घरों, कक्षाओं और समुदाय में घुस जाता है और भविष्य में व्यक्तियों के साथ समाज, देश को भी खराब करता है। इस दौरान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस मनमोहन के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर भी मौजूद रहे।
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