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चोराला तालाब में गिर रहा 10 लाख लीटर सीवरेज

चोराला तालाब में गिर रहा 10 लाख लीटर सीवरेज

संक्षेप:

नई दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र में चोराला तालाब को गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, यहाँ प्रतिदिन 10 लाख लीटर सीवरेज गिर रहा है। अनधिकृत कॉलोनियों और बारिश के पानी के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। सीवरेज नेटवर्क के कार्य सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

Jan 07, 2026 07:22 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र के बीच स्थित चोराला तालाब (डीएसआईआईडीसी) सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) के अनुसार, इस तालाब में रोजाना 10 लाख लीटर सीवरेज गिर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या मुख्य रूप से इस तालाब के भौगोलिक स्थान और आसपास के अनधिकृत निर्माणों से जुड़ी हुई है। जल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि चोराला तालाब एक निचले इलाके में स्थित है। इस वजह से औद्योगिक क्षेत्र के खुले नालों का गंदा पानी और बारिश का पानी इसी स्थान पर जमा हो जाता है, जिससे जलजमाव व प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा हो रही है।

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डीजेबी ने बताया कि तालाब से सटी छह अनधिकृत कॉलोनियां इस समस्या का मुख्य कारण हैं। इन कॉलोनियों में बने सेप्टिक टैंकों का आंशिक डिस्चार्ज सीधे तालाब क्षेत्र में पहुंच रहा है। हालांकि, इनमें से चार कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। शेष दो कॉलोनियों में किरारी जीओसी परियोजना के तहत सीवरेज नेटवर्क का कार्य जारी है। इस परियोजना के अंतर्गत 113 कॉलोनियों और छह गांवों को सीवर से जोड़ा जाना है। इसके लिए तीन अपशिष्ट जल पंपिंग स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं। बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि यह पूरा नेटवर्क सितंबर 2026 तक चालू कर दिया जाएगा। चार तालाब सीवेज मुक्त मिले रिपोर्ट में मुंडका गांव के शिशुवाला तालाब का उदाहरण देते हुए सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया गया है। यहां 300 केएलडी क्षमता की बायोरिमेडिएशन यूनिट पिछले दो वर्षों से काम कर रही है, जिससे तालाब में जाने वाले गंदे पानी को साफ किया जा रहा है। इस यूनिट में फाइटोरिड तकनीक का उपयोग किया गया है। डीजेबी ने यह भी बताया कि मुंडका क्षेत्र में सर्वे किए गए छह तालाबों में से चार जोहरी, तकिया तालाब, धर्मू वाला तालाब और दादा दोभा जोहड़ अब सीवेज मुक्त हैं।