चीन अब ‘ऑक्टोपस आर्म’ से सैटेलाइट में भरेगा ईंधन
चीन के प्रायोगिक सैटेलाइट 'हुकेदा-2' ने अंतरिक्ष की निचली कक्षा में ईंधन भरने का सफल परीक्षण किया है। इसका 'ऑक्टोपस आर्म' रोबोटिक हाथ सैटेलाइट को पकड़कर ईंधन भरने में सक्षम है। इससे नए सैटेलाइट लॉन्च करने की लागत कम होगी और अंतरिक्ष में कचरा घटेगा।

शंघाई, संवाददाता। चीन के प्रायोगिक सैटेलाइट ‘हुकेदा-2’ ने अंतरिक्ष की निचली कक्षा में ईंधन भरने का ऐतिहासिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता ‘ऑक्टोपस आर्म’ है। यह एक लचीला रोबोटिक हाथ, जो स्प्रिंग और केबल से बना है। यह हाथ अंतरिक्ष में 27,000 किमी/घंटा की अत्यधिक रफ्तार से दौड़ रहे सैटेलाइट को पकड़ने और उनमें सटीकता से नोजल फिट करके ईंधन भरने में सक्षम है। आमतौर पर ईंधन खत्म होने पर सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल में जल जाते हैं।इससे बार-बार नए सैटेलाइट लॉन्च करने का खर्च बचेगा और अंतरिक्ष में कचरा कम होगा। चीन इस नई तकनीक का उपयोग अपने ‘थौजेंड सेल्स’ सैटेलाइट समूह के लिए करेगा, जो एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ को टक्कर देने के लिए बनाया जा रहा है।
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