भारत में कर्ज का नया चेहरा, आधे से ज्यादा लोग ईएमआई पर कर रहे खरीदारी
एक नए सर्वेक्षण में पता चला है कि भारतीय अब कर्ज सिर्फ आपात स्थिति में नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली को सुधारने के लिए ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि टियर-2 शहरों में कर्ज की मांग तेजी से बढ़ी है, जहां लोग ऑनलाइन शॉपिंग और भोजन पर खर्च कर रहे हैं।

नई दिल्ली, एजेंसी। एक नए सर्वेक्षण में भारत में उधार की संस्कृति में बड़े बदलाव देखा गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि भारतीय अब कर्ज सिर्फ आपात स्थिति में नहीं बल्कि अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए ले रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म मनीव्यू ने देश के 700 से अधिक जिलों में यह सर्वे किया। इसमें पाया कि 10 में से पांच लोग व्यक्तिगत ऋण का पैसा ऑनलाइन शॉपिंग और भोजन पर खर्च कर रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि अब कर्ज लेना केवल मजबूरी नहीं बल्कि एक रणनीति बन गया है। इसमें 55% कर्जदार अपनी राशि का इस्तेमाल ऑनलाइन शॉपिंग के लिए करते हैं।
वहीं 52% कर्जदार ऑनलाइन भोजन ऑर्डर करने के लिए क्रेडिट का उपयोग करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि 40% उपभोक्ता अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए मोबाइल बैंकिंग और फिनटेक ऐप्स पर निर्भर हैं। टियर-2 शहरों का दबदबा रिपोर्ट में कहा गया कि कर्ज की मांग में सबसे ज्यादा उछाल मेट्रो शहरों के बजाय टियर-2 शहरों में देखा गया। इसमें प्रमुख रूप से कोयंबटूर, लखनऊ, इंदौर, भुवनेश्वर, मैसूर, जयपुर और नागपुर जैसे उभरते शहरों में कर्ज की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट बताती है कि अब कर्ज को प्रगति के साधन के रूप में देखा जा रहा है। यानी भारतीय अब वाहन, घर की मरम्मत-सजावट, शिक्षा और पारिवारिक आयोजनों के लिए सक्रिय रूप से कर्ज ले रहे हैं। निर्णय लेने में लैंगिक अंतर रिपोर्ट के अनुसार, कर्ज लेने के फैसले में 27 फीसदी महिलाओं के लिए परिवार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि 21 प्रतिशत पुरुष अपने दोस्तों, सहकर्मियों या वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेना अधिक पसंद करते हैं। इस बारे में मनीव्यू की मुख्य व्यवसाय अधिकारी सुषमा अब्बुरी ने कहा कि 2025 में भारत के उपभोग पैटर्न एक ऐसे देश को दर्शाते हैं जो अपनी अगली छलांग के लिए तैयार है। उभरते शहर और डिजिटल उपयोगकर्ता एक भविष्य के लिए तैयार वित्तीय संस्कृति को आकार दे रहे हैं। इन वजहों से बढ़ी मांग - स्मार्टफोन और सस्ते डाटा की वजह से टियर-2 और 3 शहरों के लोग जागरूक - ई-कॉमर्स साइट्स और फिनटेक ऐप्स का सहजता से इस्तेमाल - पहले कर्ज लेना सामाजिक बुराई था, लेकिन अब वित्तीय प्रबंधन के रूप में देखा जा रहा - छोटे शहरों में आईटी पार्क, स्टार्टअप्स और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा - स्थिर आय वाले मध्यम वर्ग की संख्या बढ़ी, जो बैंकों के लिए सुरक्षित कर्जदार

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