विकासशील देशों का भविष्य बदलने के लिए एमबीडी में बदलाव की जरूरत
वैकल्पिक हेडिंग : एमडीबी से मिलेगी सही मायने में आर्थिक मदद नई दिल्ली, विशेष...

वैकल्पिक हेडिंग : एमडीबी से मिलेगी सही मायने में आर्थिक मदद
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बहुपक्षीय विकास बैंक यानी एमडीबी पूरी दुनिया के लोगों का समर्थन करने के लिए सही माध्यम हैं। अमेरिका के पूर्व वित्तमंत्री लॉरेंस समर्स और भारत के 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष और एमडीबी के सह संयोजक एनके सिंह की तरफ से लिखे गए एक संयुक्त लेख में कहा गया है कि ये बैंक अकेले ही विशेषज्ञता, स्थायी शक्ति, कम लागत वाले वित्तपोषण और जानकारी साझा करने की क्षमताओं से युक्त होते हैं। दोनों ने ये भी माना है कि विकासशील देशों के भविष्य को बदलने में मदद करने के लिए एमडीबी को पहले खुद को बदलना होगा।
लेख में उन्होंने कहा है कि ऐसे बैंकों को ग्राहकों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनने के लिए परिवर्तन को अपनाना चाहिए साथ ही संयुक्त वित्तपोषण और अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिम को साझा करने के विषय में भी आगे आना चाहिए। इसके अलावा इस लेख में वैश्विक कमजोरियों, विशेष रूप से विकासशील देशों और कम से कम विकसित देशों की कमजोरियों को रेखांकित करने वाले मजबूत एमडीबी की जरूरत पर बल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस गर्मी में सचमुच दुनिया जल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगली पीढ़ी में एक और कोविड-स्तरीय सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा उभरने की आशंका है। साथ ही बढ़ती ब्याज दरों ने दर्जनों देशों को असहनीय कर्ज के बोझ में डाल दिया है। यही नहीं करीब आधी सदी में पहली बार, वैश्विक अर्थव्यवस्था एक साथ आने के बजाय टूट रही है।
एमडीबी विशेष रूप से विकासशील और कम विकसित देशों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ वैश्विक आर्थिक और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए दो या दो से अधिक संप्रभु राज्यों द्वारा स्थापित संस्थान हैं। एमडीबी में से कुछ विश्व बैंक, अंतर-अमेरिकी विकास बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी), अफ्रीका में आर्थिक विकास के लिए अरब बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक, पुनर्निर्माण और विकास के लिए यूरोपीय बैंक और इस्लामी विकास बैंक हैं।
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