
उपलब्धि:: चांद की कक्षा में वापस लौटा चंद्रयान-3 मॉड्यूल, भेजा महत्वपूर्ण डाटा
संक्षेप: हेडिंग विकल्प : चंद्रयान-3 मॉड्यूल दो साल बाद फ्लाईबाई घटनाओं में सफल रहा ----------------------------
हेडिंग विकल्प : चंद्रयान-3 मॉड्यूल दो साल बाद फ्लाईबाई घटनाओं में सफल रहा ---------------------------- प्वाइंटर :::::: - 6 और 11 नवंबर को दो बार फ्लाईबाई पूरा किया - अक्तूबर, 2023 में ट्रांस अर्थ इंजेक्शन के जरिये पृथ्वी की कक्षा में था मौजूद - कक्षीय बदलावों से मॉड्यूल 2025 में फिर से चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल ने एक दुर्लभ वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की। इसरो के मुताबिक, मॉड्यूल ने दो साल बाद एक बार फिर चंद्रमा के पास पहुंचा और दो फ्लाईबाई घटनाओं को अंजाम देने में सफल रहा।

गुरुवार को अंतरिक्ष एजेंसी ने यह जानकारी दी। इस गतिविधि से वैज्ञानिकों को नेविगेशन और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। दरअसल, चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर ने अगस्त, 2023 में सफल लैंडिंग की थी। इसके बाद प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्र कक्षा में घूमता रहा। अक्तूबर, 2023 में ट्रांस अर्थ इंजेक्शन के जरिये इसे पृथ्वी की उच्च कक्षा में भेज दिया था। तब से यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी और चंद्रमा के संयुक्त गुरुत्वाकर्षण प्रभावों के तहत परिक्रमा कर रहा है। प्राकृतिक गुरुत्वाकर्ष प्रभाव और कक्षीय बदलावों से मॉड्यूल 2025 में फिर से यान चंद्रमा के पास जा पहुंचा। दूसरी बार में हो सकी निगरानी एजेंसी के मुताबिक, यह अंतरिक्ष यान 4 नवंबर, 2025 को चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश कर गया, जहां चंद्र गुरुत्वाकर्षण से इसके पथ को प्रभावित करने वाला प्रमुख बल बना। 6 नवंबर को अंतरिक्ष यान ने चंद्र सतह से 3,740 किलोमीटर की दूरी पर अपना पहला फ्लाईबाई पूरा किया, लेकिन भारत के डीप स्पेस नेटवर्क की पहुंच से बाहर था। इसके बाद दूसरा फ्लाईबाई 11 नवंबर को चंद्र सतह से 4,537 किलोमीटर की दूरी पर हुआ, जिससे मॉड्यूल की सटीक निगरानी संभव हो सकी। इन फ्लाईबाई के बाद इसकी कक्षा काफी बढ़ गई और झुकाव 34 डिग्री से 22 डिग्री हो गया। इन परिवर्तनों ने मॉड्यूल की स्थिति और व्यवहार पर नई जानकारी दी। इसका महत्व क्या इन नजदीकी उड़ानों के दौरान इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क ने मॉड्यूल की कक्षा, गति और सुरक्षा पर लगातार नजर रखी। इसके जरिये नेविगेशन, चंद्र कक्षीय गतिशीलता और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिली। उपलब्ध डाटा के आधार पर इसरो भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों की वापसी और गुरुत्वाकर्षण सहायता प्राप्त फ्लाईबाई अभियानों को सूचित करने में सक्षम रहेगा। क्या होता है फ्लाईबाई फ्लाईबाई एक अंतरिक्ष उड़ान प्रक्रिया है, जिसमें एक अंतरिक्ष यान किसी खगोलीय पिंड के पास से गुजरता है। इस दौरान, वह उस पिंड के बारे में वैज्ञानिक डेटा एकत्र कर सकता है, या फिर उसकी गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके अपनी गति बढ़ा सकता है या दिशा बदल सकता है।

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