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चलते-चलते :: फर्जी समाचारों के प्रसार को रोकने के लिए एआई बन सकता है समाधान

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीNewswrap
Mon, 29 Nov 2021 04:30 PM
चलते-चलते :: फर्जी समाचारों के प्रसार को रोकने के लिए एआई बन सकता है समाधान

मॉन्ट्रियल। एजेंसी

युद्ध और सैन्य रणनीति में दुष्प्रचार किया जाता रहा है, लेकिन स्मार्ट टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया के दौर में इसमें बढ़ोतरी हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये संचार प्रौद्योगिकियां किसी भी सूचना को कहीं भी पहुंचाने के लिए अपेक्षाकृत कम लागत वाला, कम-अवरोधक तरीका प्रदान करती हैं। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकी कुछ हद तक इसका समाधान प्रदान कर सकती है।

प्रौद्योगिकी कंपनियां और सोशल मीडिया उद्यम प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और नेटवर्क विश्लेषण के माध्यम से नकली समाचारों का स्वत: पता लगाने पर काम कर रहे हैं। विचार यह है कि एक ऐसी एल्गोरिदम या प्रणाली विकसित की जाए जो ''फर्जी समाचार'' के रूप में किसी भी सूचना की पहचान करेगा और इसे कमतर बताकर उपयोगकर्ताओं को इसे न देखने के लिए हतोत्साहित करेगा। हालांकि, एआई का किसी सूचना के फर्जी होने का पता लगाना अभी भी अविश्वसनीय है। पहले तो, वर्तमान पहचान इसकी विश्वसनीयता निर्धारित करने के लिए पाठ (सामग्री) और उसके सामाजिक नेटवर्क के आकलन पर आधारित है। स्रोतों की उत्पत्ति और फर्जी समाचारों के प्रसार पैटर्न को निर्धारित करने के बावजूद, मूलभूत समस्या यह है कि एआई सामग्री की वास्तविक प्रकृति को कैसे सत्यापित करता है।

हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि कनाडा के 50 फीसदी उत्तरदाताओं को नियमित रूप से निजी मैसेजिंग ऐप के माध्यम से फर्जी समाचार प्राप्त होते हैं। इसे विनियमित करने के लिए निजता, व्यक्तिगत सुरक्षा और दुष्प्रचार पर रोक के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी। हालांकि एआई का उपयोग करके दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए संसाधनों को बेहतर बनाना जरूरी तो है, लेकिन संभावित प्रभावों को देखते हुए सावधानी और पारदर्शिता आवश्यक है। दुर्भाग्य से, नए तकनीकी समाधान इस समस्या को पूरी तरह तो हल नहीं कर सकते।

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