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छोटे बच्चों को स्कूलों में सामाजिक दूरी के साथ पढ़ाना होगा चुनौती

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीNewswrap
Thu, 28 Oct 2021 07:00 PM
छोटे बच्चों को स्कूलों में सामाजिक दूरी के साथ पढ़ाना होगा चुनौती

नई दिल्ली। ललित कौशिक

राजधानी में एक नवंबर से स्कूलों को सभी कक्षा के छात्रों के लिए 50 फीसदी क्षमता के साथ खोला जा रहा है। ऐसे में स्कूलों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती छोटे बच्चों को सामाजिक दूरी के साथ पढ़ाना और कोरोना नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा। स्कूल प्रबंधन भी छोटे बच्चों की सुरक्षा को चुनौती मानते हुए इसके लिए उचित कदम उठा रहे हैं।

अभिभावकों से भी राय मांगी

छोटे बच्चों को लेकर स्कूल प्रबंधनों द्वारा खास तैयारियां की जा रही है। इस संबंध में स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को बच्चों के स्कूल लाने से लेकर अपने कर्मचारियों के टीकाकरण की जानकारियों से अवगत कराया जा रहा है। जिससे अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हो सकें। मयूर विहार फेज-3 स्थित विद्या बाल भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. सतवीर शर्मा ने कहा कि छोटे बच्चों को लेकर चुनौतियां जरूर है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

लंच के समय में भी होगा बदलाव

छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल लंच के समय में भी बदलाव करेंगे। जिससे ज्यादा बच्चे एकत्रित न हो। कक्षा में बैठकर ही बच्चें लंच करें। टॉयलेट जाने को लेकर भीड़ न जुटे। स्कूल में एक-एक बेंच छोड़कर बच्चों को बिठाया जाएगा। अभिभावकों की सहमति के आधार पर ही बच्चों को स्कूल में आने की अनुमति होगी। अगर ज्यादा अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को राजी होते है तो उसके लिए अलग-अलग दिन में कक्षाओं को आयोजित करेंगे। कक्षा में कैमरे इस प्रकार लगवाए गए है जिससे कि बच्चा ऑनलाइन भी घर पर आसानी से पढ़ सकता है। फिलहाल प्रार्थना सभा पर रोक रहेगी। अभिभावक ही बच्चों को छोड़ने व लेने आएंगे।

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चीजों के साझा करने पर रहेगी रोक

छोटे बच्चों के बीच पानी की बोतल, स्टेशनरी से जुड़ी चीजों और लंच बॉक्स साझा करने की आदत होती है। उस पर निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को खासतौर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। घर से बच्चों को अपना सारा सामान लाना होगा। जिससे उन्हें अपने किसी दूसरे साथी से मांगने की आवश्यकता न पड़ें। अभिभावकों को सर्कुलर भेज दिया है। छात्रों की भी स्कूल खुलने को लेकर काउंसलिंग की जा रही है। स्कूल में बच्चों के लिए आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किया गया है जहां, स्टाफ और नर्स उपलब्ध रहेंगे। ऑन कॉल पर डॉक्टर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

वीडियो क्लिप से अभिभावकों को समझाएं कोविड नियम

रोहिणी स्थित माउंट आबू पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य ज्योति अरोड़ा ने कहा कि छोटे बच्चों के साथ चुनौती तो है। लेकिन स्कूल में छात्रों की क्षमता 50 फीसदी होने से ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। स्कूल में बच्चों द्वारा कोरोना के संबंध में उचित व्यवहार को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोरोना को लेकर वीडियो क्लिप के माध्यम से बच्चों का समझा रहे है कि उन्हें स्कूल में रहकर क्या करना है और क्या नहीं। अभिभावकों का साथ भी जरूरी है। बच्चों के लिए नई एसओपी भी जारी करेंगे। लंच में बच्चों को एकत्रित नहीं होने दिया जाएगा। सामाजिक दूरी को लेकर कक्षाओं में स्टिकर, हाथ धोने की उचित व्यवस्था, सैनेटाइजर, मास्क की उपलब्धता जैसे दूसरे इंतजाम किए जा चुके है। त्यौहारों के बाद ही छात्रों को बुलाएंगे। अभिभावकों को भी थोड़ा समय देना जरूरी है।

छोटे बच्चों का स्कूल आना जरूरी

मथुरा रोड स्थित डीपीएस स्कूल की प्रधानाचार्य दीक्षा खेड़ा ने कहा कि बच्चों के स्कूल बुलाने संबंधी योजना पर कार्य किया जा रहा है। प्री-प्राइमरी और प्राइमरी के बच्चों का स्कूल आना बहुत जरूरी है। उन्होंने स्कूल देखा भी नहीं है। परिवहन की व्यवस्था कैसे करनी है उस पर कार्य शुरू कर दिया है।

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों की

राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ जिला पश्चिमी-ए के सचिव संतराम ने बताया कि छोटे बच्चे ज्यादा समझदार नहीं होते है। डेढ़ साल से ज्यादा समय से बच्चे उस वातावरण में नहीं है। ऐसे में चुनौती जरूरी है। स्कूल में छोटे बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है। हम भी चाहते है कि बच्चे घर के तरह स्कूल में भी सुरक्षित रहें। छोटे बच्चों में अपने खाने-पीने से लेकर दूसरे चीजों को साझा करने की आदत होती है। ऐसे में उसे भी रोकना होगा। एक दिन में सभी कक्षाओं को बुलाना संभव नहीं है बाकि जो दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे उसके हिसाब से बच्चों को बुलाएंगे।

स्कूलों की छोटे बच्चों को लेकर तैयारी

-प्रार्थना सभा का आयोजन अभी नहीं होंगा

-कक्षा में बैठकर ही लंच करना होगा

- स्कूल परिसर में भीड़ न हो इसलिए लंच के समय में भी बदलाव

-अभिभावक ही बच्चों को स्कूल छोड़ने व लेने आएं

-अभिभावकों की सहमति के आधार पर ही छात्रों के लिए स्कूल आने की व्यवस्था होगी

-चीजों को साझा करने पर रहेगी रोक

-घर से पानी की बोतल, सैनेटाइजर और मास्क भी लाना होगा

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