आईआरएल सेंटर को केंद्रीय टीबी डिविजन से मान्यता मिली

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बेडाक्विलिन और प्रीटोमैनिड दवा की प्रतिरोधकता की जांच कर ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के इलाज में हो सकेगा इस्तेमाल

आईआरएल सेंटर को केंद्रीय टीबी डिविजन से मान्यता मिली

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। केंद्रीय टीबी डिविजन (सीटीडी) ने नई दिल्ली टीबी सेंटर के इंटरमीडिएट रेफरेंस लेबोरेटरी (आईआरएल) केंद्र को मान्यता दे दी है। इससे बेडाक्विलिन और प्रीटोमैनिड दवाओं की प्रतिरोधकता की जांच कर ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के इलाज में इस्तेमाल हो सकेगा। इससे ड्रग रजिस्टेंस या मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी के इलाज का परिणाम बेहतर होगा। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह का कहना है कि आईआरएल को मान्यता मिलने से टीबी उन्मूलन के अभियान को मजबूती मिलेगी। टीबी नियंत्रण अभियान से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि एमडीआर और एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट (एसडीआर) टीबी के इलाज में बेडाक्विलिन और प्रीटोमैनिड दवा इस्तेमाल की जाती है।

मौजूदा समय में यह एमडीआर व एक्सडीआर टीबी के इलाज में सबसे प्रभावी दवा है। दिल्ली में अभी 1165 मरीजों को यह दवा दी जा रही है। लेकिन इन दोनों दवाओं के प्रति भी एक प्रतिशत तक प्रतिरोधकता देखी गई है। दवा की प्रतिरोधकता की जांच जरूरी है। इससे यह पता चल जाता है कि किस मरीज के इलाज में दवा असर नहीं करेगी और किन मरीजों के इलाज में दवा असर करेगी। इससे इलाज का परिणाम बेहतर होता है। पहले एमडीआर टीबी के इलाज के लिए तीन वर्ष दवा लेनी होती थी। अब छह माह में मरीज ठीक हो जाते हैं। पहले दवा प्रतिरोधकता और उसके प्रभाव की जांच के लिए कई मरीजों के सैंपल बाहर भेजने पड़ते थे। अब ये जांच दिल्ली में ही हो सकेगी। इससे एमडीआर और एक्सडीआर टीबी का बेहतर इलाज हो सकेगा।

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