सीबीएसई 12वीं के परिणाम में अंक सत्यापन की सुविधा बंद

Feb 13, 2026 09:29 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए अंक सत्यापन की सुविधा बंद करने का निर्णय लिया है। अब उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' के माध्यम से होगा, जिससे अंकों की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी। जबकि 10वीं की परीक्षाओं में मैनुअल मूल्यांकन जारी रहेगा।

सीबीएसई 12वीं के परिणाम में अंक सत्यापन की सुविधा बंद

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) की 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में छात्रों के लिए अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) कराने की सुविधा बंद हो जाएगी। दरअसल, बोर्ड इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी।

डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी। दसवीं का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ ही होगा परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा। इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन भारद्वाज ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन के लिए आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कर देखा जाता था कि कहीं कोई अंक जुड़ने से रह तो नहीं गया है। इसके बाद संशोधित परिणाम जारी किया जाता था। बताया कि अब सॉफ्टवेयर के उपयोग से इस तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग ऑन स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। इसके बजाय शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। शिक्षक द्वारा दिए जाने वाले अंकों को सॉफ्टवेयर खुद ही गिनकर कुल अंक जारी कर देगा। यह होगा लाभ -अंकों की कुल गिनती की गड़बड़ी खत्म होगी -उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लगने वाला समय कम होगा -स्वचालित प्रक्रिया से मानवीय भूलों की संभावनाएं कम होंगी -शिक्षक मूल्यांकन प्रक्रिया में तेज भागीदारी निभा सकेंगे -डिजिटल मूल्यांकन से पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभकारी है -शिक्षक अपने स्कूल में ही रहकर नियमित ड्यूटी कर सकेंगे -ऑटोमेटेड सिस्टम से मूल्यांकन तेज होगा और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा -मूल्यांकन का समय 12 दिनों से घटकर करीब 9 दिन रह सकता है -कॉपियों को लाने-ले जाने पर लगने वाला समय और खर्च कम होगा 17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं। 10 अप्रैल तक चलने वाली परीक्षाओं में 8074 परीक्षा केंद्रों पर 46 लाख से अधिक छात्र शामिल होने वाले हैं।

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