‘एआई का इस्तेमाल जांच में करें, लेकिन फैसलों में नहीं’
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग जांच में तेजी लाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय मानव द्वारा ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने 134 सब-इंस्पेक्टरों की पासिंग आउट परेड में प्रशिक्षुओं को जीवनभर सीखने की सलाह दी।

नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक प्रवीण सूद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल जांच में तेजी के लिए साधन के तौर पर तो किया जा सकता है, लेकिन अंतिम मानवीय निर्णय में नहीं। ऐसा करने की बहुत जरूरत होने पर भी सावधानी बरतने की बात कही। निदेशक सूद गुरुवार को सीबीआई में शामिल हो रहे 134 दरोगाओं (सब-इंस्पेक्टर) की पासिंग आउट परेड को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रशिक्षुओं से जीवनभर सीखने की मानसिकता अपनाने की सलाह दी। कहा कि पुलिसिंग में लगातार चुनौतियां बदलती हैं, जिनका कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं होता। कार्यक्रम में स्पेशल डायरेक्टर मनोज शशिधर और संपत मीना और एडिशनल डायरेक्टर एन वेणुगोपाल और एवाईवी कृष्णा भी मौजूद रहे।
सीबीआई के इतिहास का सबसे बड़ा बैच सूद ने कहा कि सीबीआई अकादमी के इतिहास में दरोगाओं का यह सबसे बड़ा बैच है। उन्होंने इस बैच में 18 महिला अधिकारियों के शामिल होने पर भी खुशी जताई। इस दौरान उन्होंने ‘ट्रेनिंग एंड रिसर्च इन एडवांस साइबर एविडेंस लैब’ का उद्घाटन भी किया। सत्यव्रत रहे सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु दरोगा पीओपी में सत्यव्रत सिंह को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड सब-इंस्पेक्टर प्रशिक्षु के लिए डीपी कोहली पुरस्कार और इनडोर स्टडीज के लिए डीसीबीआई ट्रॉफी प्रदान की गई। साहित्य जी. को साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन ट्रॉफी, शेखर बालियान को बेस्ट आडटडोर स्टडीज के लिए जॉन लोबो ट्रॉफी दी गई। रक्षित कुमार को बेहतरीन व्यवहार के लिए सीबीआई अकादमी ट्रॉफी प्रदान की गई।

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