सजा पूरी होने के बाद आरोपी की संपत्ति रोकना कानूनन गलत : कोर्ट
नई दिल्ली, राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने कहा है कि जब कोई दोषी अपनी कानूनी सजा पूरी कर लेता है, तो उसकी संपत्ति को रोकना गलत है। कोर्ट ने संजय पांडे की जब्त की गई नगदी और सोने के सिक्के वापस लौटाने का आदेश दिया। संजय ने अपनी गलती स्वीकार की थी और सजा पूरी कर ली थी।

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जब कोई दोषी अपनी कानूनी सजा पूरी कर लेता है, तो उसकी संपत्ति या नगदी को रोककर रखना कानूनन गलत है। कोर्ट ने इसे बिना किसी कानूनी अधिकार के दोषी को एक अतिरिक्त सजा देने के बराबर माना है। इस टिप्पणी के साथ ही विशेष न्यायाधीश राजेश मलिक की अदालत ने अधीनस्थ कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए याचिकाकर्ता संजय पांडे की जब्त की गई नगदी, सोने के सिक्के और लॉकर की चाबियां तुरंत लौटाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश संजय की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया है। यह मामला साल 2015 का है। सीबीआई ने विवेक विहार स्थित स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एवं जयपुर से फर्जी दस्तावेजों के जरिए डेढ़ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में संजय पांडे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया और अदालत ने आरोपी पर विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए। हालांकि, ट्रायल के दौरान ही मुख्य आरोपी संजय ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद अदालत ने उन्हें पहले से काटी जा चुकी जेल की अवधि की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर मामला निपटा दिया。
संजय पांडे की संपत्ति की वापसी
सजा पूरी होने के बाद जब संजय ने सीबीआई द्वारा छापेमारी में जब्त की गई अपनी जीवनभर की कमाई वापस मांगी, तो निचली अदालत ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि मामले में अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ ट्रायल अभी भी लंबित है। निचली अदालत का मानना था कि चूंकि यह अपराध की कमाई हो सकती है, इसलिए ट्रायल पूरा होने तक इसे छोड़ा नहीं जा सकता। इस फैसले के खिलाफ संजय पांडे ने विशेष न्यायधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
विशेष अदालत का निर्णय
विशेष अदालत ने मामले की समीक्षा करते हुए पाया कि संजय बैंक का पूरा डेढ़ करोड़ रुपये पहले ही चुका चुके हैं। जब्त की गई नकदी या सोने के सिक्कों का अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल या जालसाजी साबित करने से कोई लेना-देना नहीं है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए सीबीआई को निर्देश दिया कि वह संजय की जब्त की गई 30 लाख से अधिक रुपये की कुल नकदी, कॉर्पोरेशन बैंक के लॉकर में रखे दस सोने के सिक्के और लॉकर की चाबियां तुरंत उन्हें लौटाएं।
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लेखक के बारे में
Nikhil Pathakशॉर्ट बायो: निखिल पाठक एक प्रतिबद्ध और तथ्यपरक पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट मीडिया में 6.5 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और स्पोर्ट्स बीट कवर कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस न्याय, जवाबदेही और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहता है।
परिचय
निखिल पाठक नई दिल्ली में आधारित एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो न्यायपालिका, पर्यावरणीय नियमन और खेल जगत से जुड़े विषयों पर गहन और संतुलित रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने 1984 सिख विरोधी दंगा मामलों के कोर्ट ट्रायल व सजा पर फैसले, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला और अदालतों के आंकड़ों पर आधारित कई प्रमुख खबरों की कवरेज की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े मामलों पर भी उनकी विस्तृत रिपोर्टिंग रही है।
करियर का सफर
निखिल पाठक ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2019 में अमर उजाला के साथ की। अमर उजाला की चंडीगढ़ यूनिट में वह डेस्क पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने खबरों के संपादन, पेज मेकिंग और डेस्क से जुड़े अन्य कार्यों की गहन समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यभार संभाला। दैनिक जागरण के पूर्वी दिल्ली कार्यालय में रहते हुए उन्होंने डीडीए, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, आरडब्ल्यूए और धर्म-कर्म जैसी बीटों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई रोचक और प्रभावी समाचार लिखे।फरवरी 2025 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ जॉइन किया। एचटी मीडिया के साथ उनका एक वर्ष का अनुभव है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
निखिल ने एमए (जर्नलिज्म) तथा बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फील्ड अनुभव का संयोजन उन्हें कानूनी, पर्यावरणीय और खेल विषयों को तथ्यात्मक व सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्टिंग विजन
निखिल का मानना है कि कोर्ट और एनजीटी से जुड़े फैसले केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे सीधे समाज, शासन और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी और पर्यावरणीय मुद्दों को पाठकों के लिए सरल, सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है।
विशेषज्ञता
कोर्ट रिपोर्टिंग (ट्रायल, सजा, महत्वपूर्ण आदेश)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)— प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशय संरक्षण
आंकड़ों पर आधारित न्यायिक रिपोर्टिंग
स्पोर्ट्स कवरेज
व्यक्तिगत रुचियां
संगीत, लेखन और बैडमिंटन
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