रिश्वत मामले में आयकर, पुलिस अफसरों को क्लीनचिट
सीबीआई ने 2022 में रिश्वत के मामले में लखनऊ के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी है। उन पर 10 करोड़ रुपये और 10 किलोग्राम सोने की ईंटें रिश्वत लेने का आरोप था। लोकपाल ने कहा कि जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए शिकायत बंद कर दी गई।

सीबीआई ने रिश्वत मामले में 2022 के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और लखनऊ के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त को क्लीनचिट दे दी। इन पर 10 करोड़ रुपये नगद और 10 किलोग्राम सोने की ईंटें रिश्वत के रूप में लेने और फरवरी 2022 में कानपुर के एक बड़े सर्राफा कारोबारी की बेहिसाब संपत्तियों को दबाने का आरोप था। लोकपाल में पेश अपनी आरंभिक जांच रिपोर्ट में सीबीआई ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि जांच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला कि रिश्वत में नगदी या सोने की लेन-देन हुई है। लोकपाल जस्टिस ए.एम खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ ने सीबीआई की आरंभिक जांच रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
पीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए आयकर विभाग के तत्कालीन उपायुक्त (मुख्यालय) लखनऊ, उपायुक्त (जांच) कानपुर और लखनऊ के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई की मांग वाली शिकायत बंद कर दी। हाल ही में पारित अपने फैसले में लोकपाल ने कहा कि हमने सीबीआई की जांच रिपोर्ट और इसमें शामिल दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकार की राय पर विचार किया है। लोकपाल ने कहा कि मामले के तथ्यों और जांच अधिकारी द्वारा किए गए ठोस विश्लेषण के आधार पर, हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अधिकारियों के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। लोकपाल ने कहा कि शिकायत में आयकर विभाग और पुलिस के नामित वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई भी ऐसा काम या चूक साबित नहीं हुई है जो भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अपराध हो, इसलिए, हमारी तरफ से मामले को कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, लोकपाल ने इस मामले को बंद कर दिया। यह था मामला मामला, 6 फरवरी, 2022 को कानपुर के एक बड़े कारोबारी के घर और शोरूम में आयकर विभाग ने एकसाथ छापेमारी की थी। आयकर विभाग की इसी कार्रवाई को लेकर पिछले साल, लोकपाल में शिकायत दाखिल कर आयकर विभाग के तत्कालीन उपायुक्त (मुख्यालय) लखनऊ, उपायुक्त (जांच) कानपुर और लखनऊ के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त पर 10 करोड़ रुपये नगद और 10 किलो सोने की ईंटें लेकर कारोबारी के लगभग 10 करोड़ रुपये की नगदी और संपत्तियों को दबाने का आरोप में कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि यह रिश्वत साक्ष्य दबाने और कारोबारी की बेहिसाब संपत्ति को बचाने के लिए अधिकारियों को दी गई। शिकायतकर्ता ने कर चोरी और धन शोधन का भी आरोप लगाया था। आरोपों के गंभीरता से लेते हुए, लोकपाल ने इस मामले में सीबीआई को जांच करने का आदेश दिया था। सीबीआई ने पहली जांच रिपोर्ट दिसंबर, 2025 और दूसरी जांच रिपोर्ट जनवरी, 2026 में लोकपाल में पेश की थी।
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