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सीबीआई और ईडी ने मिशेल की याचिका का विरोध किया

सीबीआई और ईडी ने मिशेल की याचिका का विरोध किया

संक्षेप:

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अगुस्ता वेस्टलैंड मामले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका का विरोध किया। सीबीआई ने कहा कि मिशेल बार-बार ऐसे सवाल उठा रहा है, जिन पर पहले ही अदालतें निर्णय दे चुकी हैं। जांच एजेंसियों ने कहा कि मिशेल का प्रत्यर्पण कानूनी प्रक्रिया के अनुसार था।

Jan 09, 2026 09:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली हाईकोर्ट में अगुस्ता वेस्टलैंड मामले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स द्वारा दायर याचिका का कड़ा विरोध किया। याचिका को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल व संवैधानिक अदालतों द्वारा पहले ही सुलझाए जा चुके मुद्दों को फिर से खोलने की कोशिश बताया गया। अपने जवाब में सीबीआई ने तर्क दिया कि मिशेल बार-बार उन सवालों को उठा रहा है जिन पर दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट दोनों ने पक्के तौर पर फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र डुडेजा की पीठ के समक्ष जांच एजेंसी ने कहा कि मिशेल का यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) से प्रत्यर्पण पूरी तरह से कानून के मुताबिक था।

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दुबई सुप्रीम कोर्ट के नतीजों पर भरोसा करते हुए सीबीआई ने बताया कि मिशेल को पद का गलत इस्तेमाल, धनशोधन, मिलीभगत, धोखाधड़ी, गलत इस्तेमाल व गैर-कानूनी तरीके से पैसे देने के आरोपों में प्रत्यर्पण किया गया है, जो भारत में मामले का मुख्य हिस्सा हैं। ईडी ने अपने अलग जवाब में सीबीआई के रुख को दोहराया। ईडी ने कहा कि मिशेल की याचिका खारिज की जानी चाहिए, क्योंकि इसमें तय मामलों पर फिर से फैसला मांगा गया है। यह हाईकोर्ट के खास अधिकार क्षेत्र का गलत इस्तेमाल है। एजेंसी ने साफ किया कि यूएई प्रत्यर्पण डिक्री में खुद पद का गलत इस्तेमाल, धनशोधन, धोखाधड़ी, मिलीभगत, गलत इस्तेमाल व गैर-कानूनी तरीके से पैसे देने के आरोप दर्ज हैं। इसमें प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा-21 के तहत विशेष सिद्धांत को लागू करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। इस बीच हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षकारों को मिशेल की प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका में संबंधित निर्णय के साथ संक्षिप्त लिखित पक्ष पेश करने का निर्देश दिया। इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 20 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया गया है।