
आयकर रिफंड के मामले तेजी से निपटेंगे
संक्षेप: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर रिफंड में देरी समाप्त करने के लिए आयकर आयुक्त के अधिकार बढ़ाए हैं। अब आयुक्त और अधिकृत अधिकारी करदाताओं के रिकॉर्ड में गलतियों को स्वयं सुधार सकेंगे। इससे रिफंड प्रक्रिया तेज होगी और करदाताओं को समय पर रिफंड मिलेगा।
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर रिफंड में देरी की समस्या को खत्म करने के लिए अहम फैसला लिया है। इसके तहत बोर्ड ने आयकर विभाग के केंद्रीकृत प्रोसेसिंग सेंटर, बेंगलुरु के आयकर आयुक्त के अधिकार बढ़ा दिए हैं। इसके बाद आयुक्त और अधिकृत अधिकारी करदाता के रिकॉर्ड में गलती को स्वयं सुधार सकेंगे। इस कदम से करदाता को जल्द रिफंड मिल सकेगा और आईटीआर की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी होगी। नए नियमों के अनुसार, बेंगलुरु स्थित आयकर आयुक्त को सेक्शन 154 के तहत रिकॉर्ड से स्पष्ट गलतियों को सुधारने और सेक्शन 156 के तहत टैक्स डिमांड नोटिस जारी करने का अधिकार होगा।

इसके अलावा, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को इन कार्यों के लिए लिखित आदेश जारी कर सकते हैं। इस निर्णय से टैक्स रिफंड प्रक्रिया तेज होगी और करदाताओं को अपने रिफंड या सुधार के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। सीबीडीटी के अनुसार, अतिरिक्त, संयुक्त और सबओर्डिनेट आकलन अधिकारियों के अधिकार भी बढ़ाए गए हैं। इसका मकसमद अलग-अलग क्षेत्रों के तहत गलतियों को जल्द ठीक करना है। इससे एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के बीच समन्वय भी बढ़ेगा। इस तरह के मामलों में मिलेगी राहत नए नियम के अनुसार, अब सीपीसी आयुक्त उन मामलों में सुधार कर सकेंगे, जिनमें आकलन अधिकारी और सीपीसी के सिस्टम के जरिए आदेश पारित किए गए हों। इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया है, जहां कर गणना में स्पष्ट त्रुटियां हों। जैसे अग्रिम कर या टीडीएस क्रेडिट का विचार न किया जाना, राहतों की अनदेखी या सेक्शन 244ए के तहत ब्याज की गलत गणना की गई हो। इसके लिए मामले से जुड़े आकलन अधिकारी की पहल का इंतजार नहीं करना होगा। नहीं करना होगा इंतजार 1. अब रिफंड के निर्धारण या सेक्शन 244ए के तहत ब्याज की गणना में गलती को तुरंत ठीक कर दिया जाएगा। इससे रिफंड समय पर जारी किया जा सकेगा। 2. करदाता को गलती ठीक कराने के लिए अलग-अलग अफसरों के पास नहीं जाना पड़ेगा। 3. केंद्रीकृत सुधार व्यवस्था शुरू होने से डाटा एक्युरेसी और ऑडिट ट्रेल में भी सुधार होगा। 4. हर रिकॉर्ड में हर सुधार और समायोजन की जानकारी सीपीसी के सिस्टम में होगी। इससे गड़बड़ी का जोखिम घटेगा और जवाबदेही बढ़ेगी। 5. फेसलेस और टेक्नोलॉजी आधारित कर प्रशासन के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

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