टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर रोक
एक जनसभा में विवादित बयान देने का मामला कोलकाता, एजेंसी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने

कोलकाता, एजेंसी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को पिछले महीने एक जनसभा में दिए गए बयानों से जुड़ी एफआईआर में 31 जुलाई तक सख्त कार्रवाई से सुरक्षा दी है। साथ ही अदालत ने पूछा कि क्या किसी सांसद के लिए बेवजह बयान देना उचित है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी को जांच में सहयोग करने और अगर जांच अधिकारी द्वारा उन्हें पेश होने के लिए कोई नोटिस जारी किया जाता है, तो उसका पालन करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि वे कोर्ट की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करें। कोर्ट ने कहा कि बनर्जी को पेश होने के लिए 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाएगा。
अभिषेक बनर्जी का कोर्ट में रुख
डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए 27 अप्रैल को जनसभा में एक विरोधी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिए गए अपने बयानों से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। यह पूछते हुए कि बनर्जी ने गैर-जिम्मेदाराना बयान क्यों दिए, जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अगर टीएमसी चुनाव जीत जाती तो क्या होता। उन्होंने टिप्पणी की कि इस राज्य का चुनाव के बाद होने वाली हिंसा का एक बहुत ही काला इतिहास रहा है।
अगली सुनवाई की तारीख
अदालत ने कहा कि बनर्जी के बयान न्यूज चैनलों पर दिखाए गए थे और अखबारों में प्रकाशित हुए थे। क्या जनसभा में दिए गए उनके बयान तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव और लोकसभा सांसद के पद के अनुरूप थे। टीएमसी नेता के वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि हो सकता है नहीं, लेकिन सवाल यह है कि क्या उस भाषण का कोई असर हुआ या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
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