
बिजनेसःः लीडःःमौद्रिक समीक्षा बैठक में रेपो दर में एक और वृद्धि करेगा रिजर्व बैंक
शोल्डरःः विशेषज्ञ रेपो दर में और बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे, गवर्नर शक्तिकांत दास...
शोल्डरःः विशेषज्ञ रेपो दर में और बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे, गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही संकेत दे चुके
0.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी आकस्मिक बैठक के बाद
0.35 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती दरों में
7.79 प्रतिशत पर पहुंची खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में
7वें महीने लगातार बढ़ते हुए आठ साल के उच्चतम स्तर
मुंबई एजेंसी
मुद्रास्फीति में कमी के कोई संकेत नहीं दिखने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बुधवार को अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताते हुए कहा कि गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही इसके संकेत दे चुके हैं। केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने बिना तय कार्यक्रम के हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थीं। ऐसी अटकलें हैं कि इस बार की समीक्षा में दरों में कम से कम 0.35 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है।
विशेषज्ञ आने वाले महीनों में रेपो दर में और बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे हैं। गवर्नर दास के नेतृत्व वाली एमपीसी की तीन दिन की बैठक सोमवार से शुरू होगी। बैठक के दौरान लिए गए फैसलों की घोषणा गवर्नर बुधवार को करेंगे।
खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में लगातार सातवें महीने बढ़ते हुए आठ साल के उच्चतम स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह यूक्रेन-रूस युद्ध के चलते ईंधन सहित जिंस कीमतों में बढ़ोतरी है। थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति 13 महीने से दो अंक में बनी हुई है और अप्रैल में यह 15.08 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्चस्तर को छू गई।
दास ने हाल ही में एक टीवी साक्षात्कार में कहा, रेपो दरों में कुछ बढ़ोतरी होगी, लेकिन अभी मैं नहीं बता पाऊंगा कि यह कितनी होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने एमपीसी की बैठक पर कहा कि यह समीक्षा वृद्धि और मुद्रास्फीति पर केंद्रीय बैंक के विचारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, रेपो दर में वृद्धि तो होगी, लेकिन यह 0.25-0.35 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, क्योंकि मई में हुई बैठक की टिप्पणियों में यह संकेत दिया गया था कि एमपीसी रेपो दर में बड़ी वृद्धि के पक्ष में नहीं थी। सरकार ने मुद्रास्फीति पर काबू के लिए पेट्रोल-डीजल पर शुल्क में कटौती, कुछ खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कमी और गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने सहित कई कदम उठाए हैं। बोफा सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि उसे उम्मीद है कि आरबीआई जून में रेपो दर में 0.40 प्रतिशत और अगस्त में 0.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा।
हाउसिंग डॉट कॉम, प्रॉपटाइगर डॉट कॉम और मकान डॉट कॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए एक बार फिर रेपो दर में वृद्धि किए जाने की संभावना है। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि दरों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे होनी चाहिए क्योंकि इससे रियल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
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मौद्रिक समीक्षा, वैश्विक रुख पर रहेगी बाजार की नजर
शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के नतीजों से तय होगी। इसके अलावा वैश्विक रुझान, विदेशी कोषों के रुख और कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार भागीदारों की निगाह रहेगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में हाल में सुधार दिखा है, लेकिन यह अभी मजबूत नजर नहीं आ रहा है। इसकी वजह बढ़ती मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर नीतिगत रुख को सख्त किया जाना है।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा, वैश्विक स्तर पर वृहद आंकड़े और कच्चे तेल के दाम इस सप्ताह बाजार की चाल तय करेंगे। रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजों की घोषणा आठ जून को होगी। रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, ऐसे में केंद्रीय बैंक की 'टिप्पणी' क्या रहती है, उसे देखना होगा। औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े 10 जून को कारोबार बंद होने के बाद आएंगे।
मीणा ने कहा कि वैश्विक मोर्चे पर बृहस्पतिवार को अमेरिका के बेरोजगारी दावों के आंकड़े और शुक्रवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े आने हैं। वैश्विक बाजारों की दृष्टि से ये काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।
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