
बाजार विशेषज्ञों ने जताई चिंता
केंद्रीय बजट 2026-27 में वायदा और विकल्प (एफएंडओ) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का प्रस्ताव अल्पकालिक रूप से बाजार पर दबाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लेन-देन लागत बढ़ाने के साथ-साथ व्यापारियों और निवेशकों के लिए चुनौतियां पैदा करेगा। दीर्घकालिक में यह सकारात्मक हो सकता है।
नई दिल्ली/मुंबई, एजेंसी। केंद्रीय बजट 2026–27 में वायदा और विकल्प (एफएंडओ) खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने के प्रावधान पर विशेषज्ञों ने कहा कि यह कदम अल्पकालिक रूप से बाजार के लिए दबाव पैदा कर सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक धीरज रेल्ली ने कहा, एफएंडओ में प्रस्तावित एसटीटी वृद्धि अल्पकालिक रूप से पूंजी बाजार संस्थाओं के लिए दबाव डाल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह सकारात्मक हो सकती है। एसटीटी वृद्धि को बजट भाषण के तुरंत बाद शेयर बाजार में आई तेज गिरावट का एक मुख्य कारण बताया गया। कोटक सिक्योरिटीज़ के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीपल शाह ने कहा कि एसटीटी में यह तीव्र वृद्धि व्यापारियों, जोखिम प्रबंधकों और के लिए लागत बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा, इसका उद्देश्य आमदनी अधिकतम करने से अधिक लेन-देन की मात्रा को नियंत्रित करना प्रतीत होता है, क्योंकि किसी भी संभावित आय लाभ को वायदा विकल्पों की कम मात्रा से संतुलित किया जा सकता है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म सैमको सिक्योरिटीज ने कहा, उच्च लेन-देन लागत से लेन-देन की मात्रा घटने, अल्पकालिक गति कमजोर होने और सक्रिय बाजार प्रतिभागियों के लिए लाभप्रदता कम हो सकती है। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी अनुसंधान प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि इक्विटी एफएंडओ पर एसटीटी में वृद्धि से अल्पकालिक बाजार में असुविधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा, पुनर्खरीद (बायबैक) को पूंजीगत लाभ के रूप में मानने से एक सार्थक क्षतिपूर्ति मिलती है और दीर्घकालिक निवेशक विश्वास मजबूत होता है। एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी आशीषकुमार चौहान ने कहा कि बजट अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए वायदा और विकल्प पर उच्च एसटीटी जैसे सुनियोजित उपायों के माध्यम से वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ बनाता है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फेरोज अजीज ने कहा, 'वायदा और विकल्प पर एसटीटी में वृद्धि से डेरिवेटिव व्यापारियों के लेन-देन की लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी जिससे उनकी रणनीतियों पर प्रभाव पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि यह बाजार में डेरिवेटिव लेन-देन की मात्रा कम कर सकता है और निकट भविष्य में अस्थिरता ला सकता है।

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