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चलते-चलते - ट्यूमर के बैक्टीरिया से कीमो होगी और असरदार

चलते-चलते - ट्यूमर के बैक्टीरिया से कीमो होगी और असरदार

संक्षेप:

. इंपीरियल कॉलेज लंदन और कोलोन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया शोध ……. ट्यूमर के

Oct 08, 2025 02:20 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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. इंपीरियल कॉलेज लंदन और कोलोन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया शोध ……. ट्यूमर के अंदर कुछ बैक्टीरिया खास अणु बनाते हैं कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है अणु कीमोथेरेपी की दवा हो जाती है ज्यादा असरदार भविष्य में बैक्टीरिया की मदद से कैंसर का इलाज संभव ……. लंदन, एजेंसी। ट्यूमर के अंदर रहने वाले बैक्टीरिया कैंसर के खिलाफ लड़ाई में हमारी मदद कर सकते हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन और कोलोन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस संबंध में बड़ी खोज की है। उन्होंने एक ऐसा अणु (मॉलिक्यूल) खोजा है, जिसे बैक्टीरिया बनाते हैं और जो कैंसर कोशिकाओं को कमजोर कर देता है।

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इसका नाम 2-MiCit (2-मिथाइल आइसोसाइट्रेट) है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अणु कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाता है और उनके मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को बाधित करता है, जिससे वे कीमोथेरेपी ज्यादा असरदार हो जाती है। इस खोज से यह उम्मीद मिली है कि भविष्य में हम बैक्टीरिया (सूक्ष्म जीव) की मदद से कैंसर के नए इलाज बना सकेंगे, जो अभी के इलाजों को और भी ज्यादा शक्तिशाली बना देंगे। वैज्ञानिकों ने पाया कि ट्यूमर में मौजूद बैक्टीरिया कैंसर की बढ़त और इलाज पर असर डाल सकते हैं। 2-MiCit अणु विशेष रूप से कोलोरेक्टल कैंसर से जुड़े ई. कोली बैक्टीरिया द्वारा बनाया जाता है। यह कैंसर की दवा के साथ मिलकर कैंसर कोशिकाओं पर जोरदार असर डालता है। प्रयोगशाला में की गई जांचों में वैज्ञानिकों ने छोटे कीड़ों और मानव कोशिकाओं पर इसके असर को परखा और पाया कि 2-MiCit कैंसर को रोकने में प्रभावी है और इलाज के बाद जीवों की जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है। यह अणु कैंसर कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया (ऊर्जा केंद्र) को निशाना बनाता है और कीमोथेरेपी के साथ मिलकर ज्यादा असरदार हो जाता है। यह पहली बार है जब हम कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर में रहने वाले बैक्टीरिया के बीच रासायनिक संवाद को समझ पाए हैं। टीम ने इस अणु का सिंथेटिक (कृत्रिम) रूप भी तैयार किया है, जो और भी अधिक प्रभावशाली है। इससे नई कैंसर-रोधी दवाओं के निर्माण का रास्ता खुल सकता है। यह शोध कैंसर उपचार को व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जहां मरीज के शरीर और उसमें मौजूद सूक्ष्मजीवों को ध्यान में रखकर इलाज तय किया जा सकेगा। बॉक्स - इम्यून सिस्टम होगा मजबूत कोलकाता, एजेंसी।भारत के एक बड़े वैज्ञानिक संस्थान आईआईएसईआर, कोलकाता के छात्रों ने एक ऐसा बैक्टीरिया विकसित किया है, जो कैंसर से प्रभावी ढंग से लड़ सकता है। 'रीसेट' (रीप्रोग्रेमिंग द सपरेसिव एन्वायरमेंट ऑफ ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट) नामक यह परियोजना कैंसर के उपचार के दौरान सामने आने वाली सबसे बड़ी बाधाओं में से एक का समाधान करती है। टीम ट्यूमर का पता लगाने और उसकी गतिविधि को बाधित करने के लिए 'प्रोबायोटिक्स' तैयार कर रही है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली दोबारा सक्रिय हो सकती है।