हैरत : दिमाग नहीं, फिर भी सुपर स्मार्ट

हैरत : दिमाग नहीं, फिर भी सुपर स्मार्ट

संक्षेप:

हाल ही में स्विट्जरलैंड के फ्राइबर्ग विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने बिना दिमाग वाले समुद्री जीवों पर अध्ययन किया। समुद्री तारे, जेलीफिश और एनीमोन जैसे जीव शिकार पकड़ सकते हैं और खतरे को पहचान सकते हैं। एनीमोन ने सीखा कि कैसे रोशनी के साथ झटके को जोड़ना है। ये जीव 70 करोड़ साल से अधिक समय से समुद्र में जीवित हैं।

Nov 10, 2025 11:52 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बर्न, एजेंसी। कुछ समुद्री जीवों के पास दिमाग नहीं होता, फिर भी वे सोच सकते हैं। हाल ही में इस संबंध में स्विट्जरलैंड स्थित फ्राइबर्ग विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने बिना दिमाग वाले समुद्री जीवों पर एक अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि समुद्री तारे, जेलीफिश, समुद्री अर्चिन और एनीमोन जैसे जीव शिकार पकड़ सकते हैं, खतरे को पहचान सकते हैं और अपने आस-पास के माहौल के अनुसार व्यवहार बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, “बिना दिमाग” का मतलब यह नहीं कि इन जीवों में कोई न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिकाएं) नहीं होती। जेलीफिश और एनीमोन जैसे जीवों के पास दिमाग नहीं होता, लेकिन उनके शरीर में तंत्रिका जाल होता है।

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यह न्यूरॉनों का नेटवर्क है, जो उन्हें जानकारी समझने और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। वैज्ञानिकों ने एनीमोन पर प्रयोग किया और पाया कि वे सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए, एनीमोन को रोशनी के साथ हल्के झटके जोड़ना सिखाया गया। बाद में जब केवल रोशनी दिखाई गई तो वे झटके से बचने के लिए पीछे हट गए। कुछ एनीमोन अपने जैसे दूसरे जीवों को पहचान सकते हैं और उनके प्रति अलग व्यवहार दिखाते हैं। बॉक्स जेलीफिश भी देख सकती है कि रास्ते में बाधा है और उसे देखकर रास्ता बदल देती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि “सोचना” एक बड़ा और जटिल शब्द है। इसलिए वे अक्सर संज्ञान शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसका मतलब है किसी जानकारी को समझना और उसका सही इस्तेमाल करना। इस हिसाब से, बिना दिमाग वाले जीव भी सोचते हैं, क्योंकि वे अपने आस-पास के संकेतों पर निर्णय लेते हैं। हालांकि, असली और उन्नत सोच, जैसे कि खुद को पहचानना या चेतना महसूस करना, शायद मस्तिष्क के बिना संभव नहीं है। फिर भी, ये छोटे लेकिन चालाक जीव 70 करोड़ साल से ज्यादा समय से समुद्र में जीवित हैं।