अनिल अंबानी के बैंक खाते धोखाधड़ी श्रेणी में होंगे

Feb 23, 2026 06:10 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल पीठ का अंतरिम आदेश रद्द कर दिया। यह आदेश उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस के बैंक खातों को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाने वाला था। बैंक और लेखा परामर्श कंपनी की याचिका पर खंडपीठ ने आदेश को अवैध बताया।

अनिल अंबानी के बैंक खाते धोखाधड़ी श्रेणी में होंगे

टीसी..फोटो के साथ-अनिल अंबानी मुंबई, एजेंसी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल पीठ का एक अंतरिम आदेश सोमवार को रद्द कर दिया। एकल पीठ ने उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक और लेखा परामर्श कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर फैसला सुनाया। कंपनी ने दिसंबर 2025 में पारित एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। खंडपीठ ने एकल पीठ का आदेश रद्द करते हुए इसे ‘अवैध बताया।

अनिल अंबानी के वकीलों ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि आदेश पर रोक लगाई जाए ताकि वे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें, लेकिन अदालत ने यह मांग ठुकरा दी। एकल पीठ ने इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा की गई वर्तमान और भावी कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह कार्रवाई कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण 'फोरेंसिक ऑडिट' पर आधारित है और भारतीय रिजर्व बैंक के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। अनिल अंबानी एवं उनकी कंपनी को अंतरिम राहत देने वाले दिसंबर 2025 के आदेश को तीनों बैंक ने पिछले महीने चुनौती दी थी। इन बैंक ने अपनी अपील में कहा कि जिस 'फोरेंसिक ऑडिट' के आधार पर खातों को ‘धोखाधड़ी’ की श्रेणी में डाला गया है, वह कानूनी रूप से वैध था और उसमें धन की हेराफेरी एवं दुरुपयोग के गंभीर परिणाम सामने आए हैं जो बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में दर्ज है। अनिल अंबानी ने दी थी चुनौती अनिल अंबानी ने एकल पीठ के समक्ष तीनों बैंकों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में उनके और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को ‘धोखाधड़ी खाता’ वर्गीकृत करने का प्रस्ताव था। उद्योगपति का तर्क था की बीडीओ इंडिया एलएलपी, ‘फोरेंसिक ऑडिट’ करने के लिए योग्य नहीं, क्यों कि रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ नहीं था। उन्होंने दावा किया था कि बीडीओ इंडिया एलएलपी एक लेखा परामर्श कंपनी है, न कि ऑडिट कंपनी है।

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