बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को नेता चुन साधे सामाजिक समीकरण

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को नेता चुन साधे सामाजिक समीकरण----------------------------------- देश भर के पिछड़ा समुदाय को दिया संदेश, पार्टी में बाहरी का कोई मुद्दा नहीं-उत्तर प्रदेश में भी आने...

 बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को नेता चुन साधे सामाजिक समीकरण

बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को नेता चुन साधे सामाजिक समीकरण ----------------------------------- देश भर के पिछड़ा समुदाय को दिया संदेश, पार्टी में बाहरी का कोई मुद्दा नहीं-उत्तर प्रदेश में भी आने वाले चुनाव में लाभ मिलने की संभावना---------------------------नईदिल्ली। विशेष संवाददाताबिहार में राजग सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के साथ पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के बुधवार को शपथ लेने के साथ भाजपा एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर लेगी। सम्राट चौधरी का चुनाव भाजपा की व्यापक राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा है, जिससे वह सामाजिक समीकरणों को विस्तार देने, राजग को मजबूती देने और दूसरे दलों के प्रभावी नेताओं के लिए अपने दरवाजे खुले रहने का बड़ा संदेश देंगे।बिहार

में नीतीश कुमार के साथ लंबे राजनीतिक रिश्ते में छोटे भाई की भूमिका निभाने के बाद भाजपा ने अब नीतीश से नेतृत्व की विरासत अपने हाथों में ली है। हालांकि भाजपा का नेतृत्व उसके मूल काडर से आने वाले नेता के बजाए समाजवादी पृष्ठभूमि और राजद से राजनीतिक यात्रा शुरू कर जनता दल से होते हुए भाजपा में आने वाले मौजूदा उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी संभालेंगे। सम्राट चौधरी की समाजिक पृष्ठभूमि ने उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया है। इस फैसले में भाजपा की भावी व्यापक राजनीतिक विस्तार की रणनीति शामिल है।भाजपा का एक वर्ग संभवतः इस फैसले से खुश न हो, लेकिन पार्टी के व्यापक हित में यह बड़ा कदम है। बिहार के समाजिक समीकरणों में पार्टी को लव-कुश (कोयरी-कुर्मी) समीकरणों के इससे मजबूती मिलेगी और लगभग साठ फीसद पिछड़े समुदाय में एक नया विश्वाास भी मिलेगा। अभी भाजपा का अपना बहुमत नहीं है और वह जद यू के साथ गठबंधन में हैं। ऐसे में वह केवल अपने हिसाब से फैसला नहीं ले सकती है। ऐसे में नीतीश कुमार की सम्राट को लेकर राय भी अहम भूमिका में रही है।भाजपा ने इससे साफ किया है कि दूसरे दलों के प्रभावी नेता अगर भाजपा में आते हैं तो वह भाजपा के परिवार के हिस्सा ही हैं और उनको लेकर किसी तरह का भीतरी -बाहरी जैसा सोच नहीं होगा। असम और अब बिहार इसके बड़े उदाहरण हैं। पश्चिम बंगाल में भी भाजपा इसी राह पर है। भाजपा ने देश भर के पिछड़ा वर्ग को भी संदेश दिया है कि वह अपने विस्तार के साथ अब अगड़े समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पिछड़ा वर्ग की सच्ची हितैषी है और इसमें कोई भेदभाव नहीं है।भाजपा को उम्मीद है कि उसकी इस रणनीति का लाभ अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी मिलेगा, जहां विपक्ष इस मुद्दे पर उसके लिए दिकक्त खड़ी कर सकता है। हालांकि उत्तर प्रदेश में उसके बड़े नेताओं में शुमार रहे कल्याण सिंह खुद पिछड़ा वर्ग से थे और उन्होंने ही समाजिक समीकरणों के साथ वहां पर भाजपा की जड़ें जमाई थी। इससे पिछड़ा वर्ग की राजनीति करने वाले क्षेत्रीय दलों के लिए वह दिक्कतें खड़ी करेगी।----------------------------

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