
दशकों में पहली बार, इस साल बच्चों की मौतें बढ़ेंगी
नोट: कृप्या मिंट का लोगो लगाएं गेट्स फाउंडेशन की रिपोर्ट अमेरिका सहित अमीर
नोट: कृप्या मिंट का लोगो लगाएं गेट्स फाउंडेशन की रिपोर्ट अमेरिका सहित अमीर देशों की मदद कटौती की वजह से 2.50 लाख अधिक बच्चे मरेंगे नई दिल्ली। इस साल दशकों में पहली बार 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। गेट्स फाउंडेशन की ओर से जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन की ओर से तैयार रिपोर्ट में अनुमान लगाए गए हैं कि इस साल 2024 की तुलना में लगभग 2.43 लाख ज्यादा 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत होगी।

अधिकांश मौते अफ्रीकी देशों में अधिकारियों के मुताबिक बच्चों की मौतें मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों में बढ़ी हैं, जिनमें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सोमालिया और युगांडा शामिल हैं। ये देश लड़ाई-झगड़े, बढ़ते कर्ज के ब्याज, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और हाल ही में विदेशी हेल्थ मदद में कटौती से परेशान हैं। गेट्स ने साक्षात्कार में कहा कि इसे पटरी पर आने में सालों लगेंगे। अमीर देशों की फंड कटौती बड़ा कारण गेट्स ने कहा कि इस बदलाव की वजह अमीर देशों, जिनमें अमेरिका और कुछ यूरोपियन सरकारें शामिल हैं, की मदद में 27 फीसदी की कमी है। ऐसी मदद से गरीब देशों में दवा, हेल्थ क्लीनिक और कर्मी, भोजन और बच्चों की दूसरी जरूरतें पूरी होती हैं। इन कटौतियों में ट्रंप प्रशासन का यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट में कटौती और उसे फिर से बनाना भी शामिल है। गेट्स ने कहा कि मेरा मानना है कि यह एक बहुत बड़ी गलती थी। इसी वजह से उथल-पुथल हुई है और मौतें बढ़ी हैं। 1990 से बच्चों की मौतें कम हो रहीं थी 1990 से बच्चों की मौतें कम हो रही थीं, इसका कारण वैक्सीन, दवाइयां, बेहतर पोषण, मांओं, बच्चों और छोटे बच्चों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच थी। अमेरिकी संस्था इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन(आईएचएमई) के मुताबिक, इस साल भारत और दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में बच्चों की मौत की दर में कमी आने का अनुमान है। 2025 में होने वाली मौतों की संख्या लगभग 48 लाख बताई गई है। 1990 में 1.16 करोड़ मौतें हुईं थी, यानि बच्चों की मौतें आधे से भी कम होंगी। अफ्रीका के बड़े हिस्से प्रभावित रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीका के बड़े हिस्सों में ज्यादातर बच्चे स्वास्थ्य केद्रों पर बीमार होकर पहुंच रहे हैं। अमेरिकी संस्था मर्सी कॉर्प्स के अफ्रीका के वाइस प्रेसिडेंट मेलकू यिरगा ने कहा कि कुछ क्लीनिक में, आने वाला हर बच्चा पहले से ही कुपोषित होता है।

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