नीतीश के राज्यसभा जाने से वैचारिक बदलाव संभव: दीपांकर
भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय को बिहार में वैचारिक बदलाव और राजनीतिक विमर्श में परिवर्तन का संकेत बताया। उन्होंने इसे 'बिहार की जनता के साथ विश्वासघात' करार दिया और कहा कि इससे भाजपा का जद(यू) पर प्रभुत्व बढ़ सकता है।

भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का निर्णय राज्य में एक वैचारिक बदलाव और राजनीतिक विमर्श में परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘बिहार की जनता के साथ विश्वासघात’ करार दिया। भट्टाचार्य ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम भाजपा के अपने सहयोगी जद(यू) पर बढ़ते प्रभुत्व का संकेत देता है और बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इसका मतलब केवल सत्ता पर कब्जा नहीं, बल्कि एक तरह का राजनीतिक बदलाव होगा।
इससे न सिर्फ बिहार बल्कि, संभवत: उत्तर भारत में राजनीतिक विमर्श में भी परिवर्तन आएगा। इस घटनाक्रम को वामपंथी नेता ने बड़ा झटका बताते हुए कहा कि जिस तरह से यह सब हो रहा है, वह नीतीश कुमार के प्रति बहुत अपमानजनक प्रतीत होता है।उन्होंने कहा, लोगों को बेशक पता था कि भाजपा अब प्रभावी रूप से सरकार को नियंत्रित कर रही है, लेकिन जिस तरह से यह हो रहा है वह नीतीश कुमार को अपमानजनक तरीके से दरकिनार करने जैसा है।भट्टाचार्य ने कहा कि इस कदम से कई मतदाता ठगा हुआ महसूस कर सकते हैं, क्योंकि गठबंधन ने कुमार के नाम पर जनादेश मांगा था।
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