
बिहार में गठबंधन की जीत के लिए भाजपा पूरी ताकत से जुटी
बिहार में चुनाव प्रचार चरम पर है, जहां भाजपा और उसके सहयोगी दल चुनावी जीत के लिए ताकत झोंक रहे हैं। विपक्षी महागठबंधन के साथ कांटे की लड़ाई जारी है। भाजपा का मानना है कि छोटी पार्टियों का स्ट्राइक रेट बेहतर हो सकता है। चुनावी हिंसा और ध्रुवीकरण का असर भी देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बिहार में चुनाव प्रचार चरम पर है। भाजपा के भी सभी प्रमुख नेता चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। भाजपा अपने साथ-साथ गठबंधन के उम्मीदवारों को भी जिताने के लिए पूरी ताकत से जुट गई है। संयुक्त सभाओं के साथ भाजपा के कई प्रमुख नेता सहयोगी दलों की सीटों की कमान भी संभाले हुए हैं। विपक्षी महागठबंधन के साथ कांटे की लड़ाई में भाजपा के लिए अपने साथ सहयोगी दलों की जीत की दर (स्ट्राइक रेट) बढ़ाना बेहद जरूरी है। इधर, राज्य में चुनाव के दौरान हो रही हिंसा का भी असर पड़ने और ध्रुवीकरण बढ़ने के आसार हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि राजग लगभग दो तिहाई सीटें जीतकर फिर सरकार बनाएगा। हालांकि विपक्षी गठबंधन की तरफ से भी ऐसे ही दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में कांटे की लड़ाई में एक-एक सीट को लेकर ताकत झोंकी जा रही है। चूंकि दोनों तरफ से गठबंधनों की लड़ाई है, ऐसे में हर दल के स्ट्राइक रेट पर नजर लगी हुई है कि वह अपने हिस्से में आई कितनी सीटें जीत सकता है। दरअसल राजद को छोड़कर कोई भी दल इतनी सीटों पर नहीं लड़ रहा है कि अपने दम पर बहुमत हासिल कर सके। भाजपा नेताओं का कहना है कि उसके छोटे सहयोगी दलों का स्ट्राइक रेट बेहतर रह सकता है यानी कम सीटों पर लड़ कर ज्यादा सीटें जीतने के आसार है। इसलिए इन दलों के उम्मीदवारों के लिए भी भाजपा नेता ज्यादा प्रचार कर रहे हैं और उसके प्रबंधक चुनावी प्रबंधन को मजबूत कर रहे हैं। पिछली बार उसके छोटे सहयोगी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। भाजपा राज्य में नई ताकत बनने की कोशिश कर रही जनसुराज को ज्यादा अहमियत नहीं दे रही है। उसका कहना है कि किसी प्रमुख दल से टिकट न मिलने पर जो निर्दलीय चुनाव लड़ते थे, वही उसके साथ प्रभावी दिख रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि राज्य में चुनावों के दौरान हो रही हिंसा का भी कुछ असर पड़ सकता है। इससे होने वाले ध्रुवीकरण को भाजपा अपने पक्ष में देख रही है। उसका मानना है कि वही लोग इसमें शामिल हैं जो पूर्व में जंगलराज के लिए जिम्मेदार थे। जनता उनको देख व समझ रही है, इससे राजग की स्थिति और मजबूत होगी। हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि लड़ाई एक एक सीट की है। वह तेजस्वी यादव को लेकर युवाओं की प्रतिक्रिया और जन सुराज के विकल्प को भी हलके में नहीं ले रही है। चूंकि युवा विकास व रोजगार से जुड़ा है इसलिए राजग को ज्यादा समर्थन मिलने की संभावना है।

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