
करीबी मुकाबला होने पर विधायको को शिफ्ट कर सकता है महागठबंधन
- जीत के फौरन बाद विधायकों को पटना पहुंचने के निर्देश- पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना हो सकते हैं शिफ्टनई दिल्ली विशेष संवाददाताबिहार चुनाव में तमाम एग्जिट पोल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में...
बिहार चुनाव में तमाम एग्जिट पोल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई में एनडीए की भारी जीत बता रहे हैं, वहीं महागठबंधन को अभी भी खुद पर भरोसा है। ऐसे में महागठबंधन ने नतीजों के फौरन बाद अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की योजना को अंतिम रुप देना शुरु कर दिया है। इसके तहत महागठबंधन के विधायकों को जीत के फौरन बाद दूसरे राज्यों में शिफ्ट किया जा सकता है। कांग्रेस यह कहती रही है कि बिहार में मुकाबला दो महागठबंधनों के बीच है। ऐसे में किसी तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। चुनाव में अधिक मतदान को दोनों गठबंधन अपने पक्ष में मान रहे हैं।
ऐसे में महागठबंधन को भरोसा है कि चुनावी मुकाबला बहुत करीबी भी हो सकता है। इसलिए, नतीजों के बाद हॉर्स ट्रेडिग की नौबत आने पर महागठबंधन अपने विधायक शिफ्ट कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल ने अपने सभी विधायकों को जीत के फौरन बाद पटना बुलाने की तैयारी शुरु कर दी है। हॉर्स ट्रेडिंग की स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा छोटा पार्टियों से रहता है। ऐसे में वीआईपी और राजद के विधायकों को पश्चिम बंगाल शिफ्ट किया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस भी अपने विधायकों को जीत के फौरन पटना बुला सकती है। उन्हें तेलंगाना या कर्नाटक भेजा जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसी संभावना कम है कि बंपर वोटिंग के बावजूद किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिले। पर जमीन पर जिस तरह दोनों गठबंधनों के बीच करीबी मुकाबला दिखाई पड़ा है, उससे साफ है कि हार जीत का अंतर बहुत कम होगा। वहीं, जन सुराज पार्टी की भूमिका भी अहम होगी। प्रशांत किशोर की अगुआई वाली जन सुराज पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है।

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