
बिहार चुनाव में कांग्रेस को अपना प्रदर्शन सुधरने की उम्मीद
- पार्टी इस पर 61 सीट पर लड़ रही है चुनाव, नौ सीट पर फ्रैडली फाइटनई दिल्ली विशेष संवाददाताबिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला चौदह...
बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला चौदह नवंबर को मतगणना के वक्त होगा। पर राजनीतिक दलों ने हार जीत का आंकलन शुरू कर दिया है। महागठबंधन को जहां बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, वहीं कांग्रेस को भी सीट बढ़ने का भरोसा है। कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनावों के मुकाबले बेहतर रहेगा। पर पार्टी जीत के आंकड़ों को लेकर कोई दावा करने से बच रही है। क्योंकि, पार्टी के सामने सीटों की गिनती से ज्यादा साख बचाने की चुनौती है। यही वजह है कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
बिहार में कांग्रेस ने इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले 9 सीट कम यानि 61 सीट पर चुनाव लड़ा है। इनमें से नौ सीट पर पार्टी महागठबंधन के घटकदलों के साथ फ्रैंडली फाइट है। ऐसे में पार्टी सिर्फ 52 सीट पर चुनाव लड़ रही है। इनमें से भी 23 सीट ऐसी है, जहां पिछले सात चुनाव में महागठबंधन कोई चुनाव नहीं जीता है। इसके साथ 15 सीट पर पिछले सात चुनावों में महागठबंधन के किसी घटकदलों को सिर्फ एक बार जीत मिली है। ऐसे में 38 सीट पार्टी के लिए बेहद मुश्किल है। ऐसे में पार्टी के पास अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए बहुत ज्यादा सीट नहीं है। क्योंकि, दोस्ताना मुकाबला वाली सीट पर वोट बंटवारे से गठबंधन का वोट बिखर जाएगा। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी ने पूरी ताकत और तालमेल के साथ चुनाव लड़ा है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि घटकदल एक-दूसरे को अपना वोट ट्रांसफर कराने में सफल रहे हैं। इसके साथ महागठबंधन अपने चुनावी वादे भी आम लोगों तक पहुंचाने में सफल रहा है और इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा। वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीट पर चुनाव लड़कर 19 सीट जीती थी।

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