अरावली के दो फीसदी हिस्से में ही खनन होगा : भूपेंद्र यादव
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को लेकर खनन की अनुमति देने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित रहेगा और केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही खनन होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत नए खनन पट्टों पर रोक पहले से लागू है।

दक्षिण 24 परगना/नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा बदलकर बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि अरावली क्षेत्र का करीब 90 फीसदी हिस्सा संरक्षित क्षेत्र के दायरे में रहेगा और खनन सख्त शर्तों के तहत केवल दो फीसदी क्षेत्र में ही संभव होगा। पर्यावरण मंत्री यादव ने कहा, अरावली का कुल क्षेत्रफल लगभग 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से केवल करीब 217 वर्ग किलोमीटर, यानी लगभग दो प्रतिशत क्षेत्र ही खनन के लिए है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भी तब तक खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक सतत खनन प्रबंधन योजना तैयार नहीं हो जाती।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक पहले से ही लागू है। पर्यावरण मंत्री ने सुंदरबन टाइगर रिजर्व में एक अहम बैठक के बाद कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर नई परिभाषा से अरावली क्षेत्र के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से का संरक्षण और मजबूत होगा। उन्होंने ‘100 मीटर’ मानक को लेकर उठे विवाद पर भी सफाई दी। कहा, अरावली पहाड़ियों और पर्वत शृंखला की परिभाषा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी राज्यों में एक जैसी की गई है, ताकि भ्रम और दुरुपयोग को रोका जा सके। पहले अलग-अलग मानकों के कारण पहाड़ियों की तलहटी के पास तक खनन की अनुमति मिल जाती थी। यह सफाई दी -यह मान लेना गलत है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां खनन के लिए खुली। -प्रतिबंध पूरी पहाड़ी प्रणाली और उससे जुड़े इलाकों पर लागू, न कि केवल पहाड़ी की चोटी पर। -जब तक पूरे अरावली क्षेत्र के लिए खनन की प्रबंधन योजना तैयार नहीं होती, खनन पट्टे नहीं दिए जाएंगे। ‘सेव अरावली’ अभियान पर निशाना साधा भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार द्वारा अरावली की नई परिभाषा तय किए जाने से राज्य की 90 प्रतिशत पहाड़ियां नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने गहलोत के ‘सेव अरावली’ अभियान पर निशाना साधते हुए कहा, अरावली क्षेत्र का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और आरक्षित वनों में आता है, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल राजस्थान में थी स्पष्ट परिभाषा पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान मई 2024 में एक समिति बनाई थी। इस समिति में राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने पाया कि केवल राजस्थान में 2006 से एक स्पष्ट परिभाषा लागू है, जिसे अब अन्य राज्यों ने भी अपनाने पर सहमति दी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के उपायों की समीक्षा भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में रविवार को सुंदरबन टाइगर रिजर्व में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28वीं और प्रोजेक्ट एलिफेंट की 22वीं बैठक आयोजित की गई। बैठकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के उपायों, बाघ और हाथी संरक्षण की प्रगति तथा प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की समीक्षा की गई। बैठकों में बाघ और हाथी बहुल राज्यों के अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए। एनटीसीए बैठक में भूपेंद्र यादव ने वैज्ञानिक प्रबंधन, समुदाय की भागीदारी और अंतर-राज्यीय समन्वय पर जोर दिया। मानव-बाघ संघर्ष से निपटने के लिए तीन-स्तरीय रणनीति और ‘टाइगर रिजर्व से बाहर बाघ प्रबंधन’ परियोजना पर चर्चा हुई। असम में हाथियों की मौत पर केंद्र ने रिपोर्ट मांगी भूपेंद्र यादव ने कहा कि असम के होजाई जिले में ट्रेन की चपेट में आने से सात हाथियों की मौत के मामले में केंद्र सरकार ने रिपोर्ट तलब की है। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यादव ने बताया कि सभी राज्यों को रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की आवाजाही पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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