ब्यूरो::: अब पर्यटन के मानचित्र पर उभरेगा बस्तर
- बड़े प्लान पर केंद्र सरकार की मदद से चलेगा काम पंकज

बस्तर। नक्सल मुक्त बस्तर अब पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरकर सामने आएगा । यहां के प्राकृतिक सौंदर्य , पहाड़ियों, झरनों को पर्यटन सूची से जोड़ा जाएगा और यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गृह मंत्री से मिले निर्देश के बाद अब हमारा पूरा फोकस बस्तर में हर दृष्टि से विकास सुनिश्चित करना है। पर्यटन को लेकर यहां असीम संभावनाएं हैं और सरकार इसके लिए खास रियायतें देकर दर्शनीय स्थलों के विकास की मुहिम चलाएगी।
अबूझमाड़ को घूमने लायक बनाया जाएगा
दंतेवाड़ा से लेकर अबूझमाड़ तक कई दर्शनीय स्थल विकसित किए जाएंगे। अबूझमाड़ में उन 400 गांवों का सर्वे शुरू हो रहा है जहां आज तक कोई भी सरकारी तंत्र नहीं पहुंचा। यहां दशकों तक न तो सरकार की मौजूदगी नजर आई और न ही कोई योजना यहां पहुंच पाई। बेहद सघन इलाके में खूबसूरत प्राकृतिक झरने, पहाड़ियां और आदिवासियों के महत्त्वपूर्ण स्थल भी हैं। सरकार अब इन इलाकों को प्राथमिकता सूची में शामिल कर रही है।
आईआईटी रुड़की करेगा सर्वे
सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने कहा, अबूझमाड़ सहित बस्तर के 400 गांवों में सुरक्षा बलों के पहुंचने के बाद सरकार पहली बार यहां आधिकारिक रूप से कदम रखने जा रही है। राजस्व सर्वे होने से सदियों से गुमनाम रहे इलाके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। सर्वे के लिए आईआईटी रुड़की को जिम्मेदारी दी गई है। अबूझमाड़, जिसे दशकों तक माओवाद के साये और दुर्गम रास्तों के कारण अबूझ (अनसुलझा) माना जाता था, अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहा है। सर्वे केवल जमीन नापने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि जल, जंगल, नदी, तालाब और खेतों का वैज्ञानिक तरीके से रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
नक्सल के प्रतीक भी मिटाए जा रहे
सुरक्षा बल नक्सल खात्मे के बाद अब जंगल और पहाड़ियों में बनाए गए नक्सलियों के स्मारकों को ढहा रहे हैं। इन स्थानों पर तिरंगा फहराया जा रहा है। वहीं आदिवासियों की संस्कृति और उनकी विरासत से जुड़े स्थलों को संरक्षित करने का भरोसा दिया गया है। राज्य सरकार यहां एक संग्रहालय भी खोलना चाहती है। मुख्यमंत्री साय ने गृहमंत्री शाह के सामने यह मांग रखी है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को नक्सल के रक्तरंजित इतिहास से अवगत कराना जरूरी है जिससे उन्हें नक्सल की हकीकत और इससे लड़ने वालों के बलिदान की जानकारी हो।
नए थानों में डीआरजी भी होंगे
नक्सल मुक्त इलाकों में नए थाने भी खोले जाएंगे। इन थानों में स्थानीय पुलिस के साथ डीआरजी के जवान भी तैनात होंगे। डीआरजी का नक्सलरोधी अभियान में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बस्तर के नक्सल मुक्त हुए इलाकों में कुल 37 नए थाने खोलने का प्रस्ताव है।
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