कर्ज चुकाने के बाद भी बैंक कटवा रहे चक्कर

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बैंक और एनबीएफसी से ऋण लेने वाले ग्राहकों को समय पर कर्ज चुकाने के बाद भी खाता बंद करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्राहकों ने समय पर ऋण चुकाया, लेकिन बैंक ने उनकी रिपोर्ट में लोन सेटलमेंट लिखा है। शिकायतों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें निजी बैंकों के खिलाफ सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

कर्ज चुकाने के बाद भी बैंक कटवा रहे चक्कर

शोल्डर::ग्राहकों द्वारा समय पर पूरा कर्ज चुकाने के बाद भी बैंक व एनबीएफसी लगा रहे सेटलमेंट रिपोर्ट नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से ऋण लेने के बाद उस खाते को बंद करने की प्रक्रिया कहीं ज्यादा मुश्किल भरी है। ऋण समय पर या उससे पहले चुकाने के लिए आंशिक भुगतान और पूर्ण ऋण भुगतान करने वाले ग्राहकों को भी चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि बैंक काफी मामलों में ग्राहक से पूर्ण ऋण वसूली करने के बाद भी खाता बंद करने की रिपोर्ट नहीं लगा रहे है। यहां तक कि काफी मामलों में ग्राहकों का सिबिल स्कोर भी खराब किया जा रहा है।

बैंकों के खिलाफ शिकायतें

बैंकों के खिलाफ ऐसी शिकायतों की संख्या बढ़ी है, जिसमें देखा गया है कि ग्राहक समय पर ऋण जमा करना चाहता है लेकिन बैंक पहले आंशिक भुगतान लेने में आनाकानी करते हैं और फिर भुगतान लेने के बाद भी क्लोजर रिपोर्ट नहीं लगाई जा रही है। ऐेसे काफी सारे मामले सामने आए हैं जिसमें ग्राहकों ने समय पर किस्त भरी और निर्धारित समय से पहले पूरा ऋण चुका दिया, लेकिन बैंक ने अपनी रिपोर्ट में लोन क्लोजर रिपोर्ट न लिखकर लोन सेटलमेंट लिखा।

बैंकिंग की भाषा में लोन सेटलमेंट उस स्थिति में होता है, जब ग्राहक ने समय पर किस्त या ऋण न चुकाया हो और बैंक ने बाद में ऋण वसूली के लिए ग्राहक के साथ बैठक कर एक अंतिम बकाया धनराशि निर्धारित की हो। उसके बाद ग्राहक द्वारा ऋण जमा करा दिया गया है। ऐसी ऋण वसूली को लोन सेटलमेंट कहा जाता है लेकिन उसमें सिबिल स्कोर गिरकर 70-100 तक आ जाता है। जबकि लोन क्लोजर रिपोर्ट का मतलब होता है कि ग्राहक द्वारा ऋण राशि का समय पर पूर्ण भुगतान कर दिया है। इसमें सिबिल स्कोर बेहतर रहता है।

लोकपाल से लेकर सोशल मीडिया तक शिकायतों की भरमार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशाल नाम के यूजर ने लिखा कि उन्हें लोन बंद होने का अपडेट और एनओसी पाने के लिए 18 दिन का इंतजार करना पड़ा जबकि कंपनी ने पांच कार्य दिवसों में ऋण की स्थिति को अपडेट करने का आश्वासन दिया था। वहीं, एक अन्य ग्राहक प्रवीण सिंह ने लिखा कि वह बीते एक सप्ताह से गोल्ड लोन बंद करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बैंक की शाखा में गए तो उन्होंने कहा कि प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जबकि ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करने पर कोई समाधान नहीं हो रहा है। वहीं एक अन्य ग्राहक अंजली ने लिखा कि वह अपने आवास ऋण का आंशिक भुगतान करना चाहती है। बैंक की कस्मटर सपोर्ट मेल आईडी पर लिखित मेल किया लेकिन एक सप्ताह के बाद भी बैंक भुगतान करने के लिए लिंक जनरेट करने के लिए नहीं दे रहा है। जबकि ब्रांच का कहना है कि यह प्रक्रिया आप ऑनलाइन कर सकती हैं।

पूरा भुगतान करने पर भी बकाया दिखा रहे

काफी मामलों में देखने को मिला है कि ग्राहक ने बैंक व एनबीएफसी को ऋण का पूरा भुगतान कर दिया लेकिन क्लोजर रिपोर्ट लगाने की अंतिम तिथि नजदीक आने से पहले बैंक ग्राहकों को मेल भेजते हैं कि आपकी कुछ धनराशि बकाया है। आप उसको जमा करें, जिस पर कुछ पेनल्टी भी देनी होगी। ऐसे मामलों में ग्राहकों पर 500-700 या कुछ हजार की धनराशि बकाया दिखाई जाती है। अगर ग्राहक उस जमा नहीं करते हैं तो बैंक लोन क्लोजर की जगह पर लोन सेटलमेंट की रिपोर्ट लगा देता है।

निजी बैंकों के खिलाफ सबसे अधिक शिकायतें

आरबीआई लोकपाल को वित्तीय वर्ष 2025 में 13.45 हजार शिकायतें प्राप्त हुईं, जिसमें से 29 फीसदी से अधिक शिकायतें अकेले कर्ज से संबंधित थीं। कुल प्राप्त शिकायतों में सबसे बड़ा हिस्सा ऋण और अग्रिम ऋण का रहा है। ऋण से जुड़े मामलों में निजी बैंकों की स्थिति सबसे खराब है। करीब 37 फीसदी से अधिक शिकायतें निजी बैंकों के खिलाफ प्राप्त हुईं। रिजर्व बैंक से जुड़े अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि वित्तीय वर्ष 2026 में कर्ज से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोतरी हुई है। इसलिए आरबीआई एक जुलाई से ऋण और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के निपटान के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिसके तहत बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ाई जा रही है।

ऋण जमा करने के नियम व बैंक की जिम्मेदारी

- बैंकों को अनिवार्य रूप से हर 15 दिन में उधारकर्ताओं का डेटा अपडेट करना होगा

- कर्ज पूरा होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर बैंक को यह जानकारी सिबिल को भेजनी होगी।

- ऋण लोन चुकता होने के सात से 15 कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक को बैंक एनओसी देगा।

- बैंक को कर्ज बंद होने के 30 दिनों के भीतर वे दस्तावेज वापस करने होंगे।

कहां पर करें शिकायत?

- सबसे पहले अपने बैंक की शाखा में लिखित शिकायत दें।

- अगर सात दिनों में बैंक से समाधान नहीं मिलता है तो बैंक के प्रधान नोडल अधिकारी को ईमेल या पत्र से शिकायत करें।

- अगर बैंक से 30 दिनों में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता या बैंक शिकायत को खारिज कर देता है, तो आप सीधे आरबीआई लोकपाल से शिकायत करें।

- आरबीआई लोकपाल से शिकायत करने के लिए पोर्टल cms.rbi.org.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

- या फिर आप 14448 पर कॉल करके सहायता ले सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

ग्राहक को लोन क्लोजर रिपोर्ट पाने में कितने दिन लग सकते हैं?
ग्राहक को लोन बंद होने का अपडेट और एनओसी पाने के लिए 18 दिन का इंतजार करना पड़ सकता है।
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