हंसी-हंसी में जीवन के बड़े संदेश दे गया नाटक 'एमएनसी एक्जीक्यूटिव'
नई दिल्ली में 'एमएनसी एक्जीक्यूटिव' नाटक ने कामकाजी जीवन में तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के मुद्दे को उठाया। बच्चों ने हास्य के माध्यम से यह संदेश दिया कि कार्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। नाटक के लेखक ने युवाओं में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। जीवन की भागदौड़ और दफ्तर में टारगेट पूरा करने का दबाव तमाम की स्वास्थ्य परेशानियां दे रहा है। जरूरत है एक स्वस्थ और संतुलित जीवन व कार्यशैली की। एलटीजी सभागार में गुरुवार को मंचित नाटक 'एमएनसी एक्जीक्यूटिव' हंसी-हंसी में कुछ ऐसे ही संदेश दे गया। खास बात यह रही है कि नाटक में सभी किरदार स्कूल के बच्चों ने निभाए। यूं तो नाटक में खासतौर पर बीमा सेक्टर में निजी क्षेत्र के प्रवेश के बाद से इसमें काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ने वाले दबावों को उजागर किया गया है। कर्मचारी अपने कार्यालय के टारगेट पूरा करने के दबाव में कहीं तो अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो जाते हैं।

तो कहीं वे नशे और पार्टी की लत में पड़कर अपना जीवन आप को बर्बाद करने लगते हैं। ऐसे में जरूरत है कि वे अपने काम और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक संतुलन कायम करें। नाटक इसी गंभीर मैसेज को बेहद हल्के-फुल्के और हास्य भरे अंदाज में प्रस्तुत करता है। नाटक के लेखक राजेश सहगल बताते हैं कि आज कल युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में करियर के साथ-साथ परिवार को समय भी देने की जरूरत है। नाटक में काम करने वाले सभी स्कूली बच्चों का चयन एक कार्यशाला के दौरान किया गया। बच्चों ने अपने अभिनय से सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। कभी तो उनकी भाव-भंगिमा लोगों को हंसाती रही तो कभी उनके गंभीर संवादों ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। बड़े मंच पर पहली बार अभिनय कर रहे स्कूली बच्चों ने सभी को प्रभावित किया। नाटक का निर्देशन पूजा धवन और राजेश सहगल ने किया।

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