एटीएम में नगदी की कमी से घबराने की जरूरत नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 22 मई तक चलन में मौजूद नोटों का कुल मूल्य ₹42.54 लाख करोड़ था, जिस पर एटीएम ऑपरेटर चेतावनी दे रहे हैं। कुछ मशीनों में नगदी की कमी हो सकती है। एटीएम ऑपरेटरों, कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों और सेवा प्रदाताओं की संगठन 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एटीएस इंडस्ट्री' ने नोट भरने के लिए कमी की ओर इशारा किया है।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 22 मई तक चलन में मौजूद नोटों का कुल मूल्य रिकॉर्ड ₹42.54 लाख करोड़ था , जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 12% ज़्यादा हैं। इतना होने पर भी एटीएम ऑपरेटर चेतावनी दे रहे हैं कि कुछ मशीनों में नगदी की कमी हो सकती है।
क्यों दी जा रही है नगदी की कमी की चेतावनी
संस्था के अनुसार, एटीएम ऑपरेटरों को मार्च और अप्रैल दोनों महीनों में नोट भरने के लिए लगभग ₹94,000 करोड़ की जरूरत थी। हालांकि, मार्च में सिर्फ ₹61,000 करोड़ और अप्रैल में ₹54,000 करोड़ नगद ही उपलब्ध हो पाया। आरबीआई के डेटा से पता चलता है कि एटीएम लेनदेन में घटकर 446.5 मिलियन रह गए, जो एक साल पहले 498.4 मिलियन थे; यानी इसमें 10% से ज़्यादा की गिरावट आई है। नगद निकालने की कुल रकम भी लगभग ₹2.64 ट्रिलियन से घटकर ₹2.5 ट्रिलियन हो गई।
क्या बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी है
विशेषज्ञों के मुताबिक एटीएम में नकदी की कमी का मतलब यह नहीं है कि बैंकों के पास धन की कमी हो गई है। देश की बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी और तरलता मौजूद है। समस्या मुख्य रूप से एटीएम तक नगदी पहुंचाने और उन्हें समय पर भरने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।
नकदी आपूर्ति और रीफिलिंग में आ रही दिक्कतें
एटीएम नेटवर्क से जुड़े उद्योग संगठनों का कहना है कि नकदी प्रबंधन कंपनियों को एटीएम में समय पर नोट भरने में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एटीएम तक नकदी पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में बैंक, करेंसी चेस्ट और कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल होती हैं। यदि किसी स्तर पर नगदी उपलब्ध कराने या उसके परिवहन में देरी होती है तो एटीएम खाली हो सकते हैं।
ग्रामीण और छोटे शहरों पर ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नगदी की कमी का असर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे सकता है। बड़े शहरों में एक ही इलाके में कई बैंक और एटीएम उपलब्ध होते हैं, इसलिए किसी एक मशीन में नगदी खत्म होने पर ग्राहक दूसरे एटीएम का उपयोग कर सकते हैं। इसके विपरीत छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम की संख्या कम होने के कारण लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में समय पर नगदी पहुंचाना भी अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण होता है।
डिजिटल भुगतान ने घटाई नकदी पर निर्भरता
पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल भुगतान सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे रोजमर्रा के लेनदेन के लिए नगदी पर निर्भरता कम हुई है। यही कारण है कि एटीएम में अस्थायी नगदी कमी का असर पहले की तुलना में सीमित रहता है। अधिकांश उपभोक्ता डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकते हैं और उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्राहकों को घबराकर बड़ी मात्रा में नगदी निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे अनावश्यक दबाव पैदा हो सकता है। इसके बजाय लोगों को कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए।
-यूपीआई, कार्ड और नेट बैंकिंग जैसे वैकल्पिक भुगतान साधनों का उपयोग करें।
-जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक के एटीएम का भी इस्तेमाल करें।
-आपात स्थिति के लिए सीमित मात्रा में नगदी अपने पास रखें।
-अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें।
-घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत
सामान्य प्रश्न
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