जंगल खाली कराने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम : सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मील का पत्थर बताया, जिसमें आरक्षित वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अब तक 1.25 लाख बीघा वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जबकि 20 लाख बीघा भूमि अभी भी अवैध कब्जे में है।

गुवाहाटी, एजेंसी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को मील का पत्थर बताया, जिसमें आरक्षित वन क्षेत्रों से विशेष समिति की अनुमति के बाद अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी गई है। सरमा ने कहा कि इससे अतिक्रमण हटाने की मुहिम में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि अब तक 1.25 लाख बीघा से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि लगभग 20 लाख बीघा भूमि अभी भी अवैध कब्जे में है। मुख्यमंत्री ने यहां एक प्रेस वार्ता में कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है, जिससे राज्य को वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का पूरा अधिकार मिल गया है।
सरमा ने दावा किया कि राज्य में अब तक कुल 1,25,326 बीघा वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि अभी भी लगभग 25-26 लाख बीघा वन भूमि पर कब्जा है, जिसमें आदिवासी समुदायों के कब्जे वाली भूमि भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र वनवासियों को संबंधित कानूनों के तहत ‘वन पट्टा’ दिया जाएगा।
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