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अशोक चव्हाण :::: सात माह में चार और दिग्गज नेता छोड़ चुके हैं साथ

नई दिल्ली, एजेंसी। पिछले सात महीने में चार दिग्गज नेता कांग्रेस का साथ छोड़...

अशोक चव्हाण :::: सात माह में चार और दिग्गज नेता छोड़ चुके हैं साथ
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMon, 12 Feb 2024 06:00 PM
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नई दिल्ली, एजेंसी।
पिछले सात महीने में चार दिग्गज नेता कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। इनमें बाबा सिद्दीकी, मिलिंद देवड़ा, जगदीश शेट्टार और अरविंद नेताम शामिल हैं। इन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उन्हें पार्टी में हाशिये पर रखा गया है।

1. बाबा सिद्दीकी

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी ने आठ फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके दो दिन बाद वह एनसीपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा था, कांग्रेस में मुझे कड़ी पत्ते की तरह इस्तेमाल किया गया, जिसका काम सिर्फ स्वाद बढ़ाना होता है। जब आपकी बात न सुनी जाए तो आप किनारा कर ही लेते हैं। मैं 48 साल तक कांग्रेस से जुड़ा रहा। बाबा सिद्दीकी का पूरा नाम बाबा जियाउद्दीन सिद्दीकी है। वे 1977 में छात्र जीवन में ही कांग्रेस से जुड़ गए थे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद वह 1992 और 1997 में दो बार बीएमसी नगर निगम पार्षद चुने गए। इसके बाद 1999, 2004 और 2009 में तीन बार बांद्रा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। उनके बेटे जीशान सिद्दीकी बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से अभी कांग्रेस के विधायक हैं और मुंबई युवा कांग्रेस के नेता भी हैं। बाबा सिद्दीकी हर साल रमजान के दौरान अपनी इफ्तार पार्टी के लिए सुर्खियों में रहते हैं। उनकी पार्टी में बॉलीवुड अभिनेता सलमान और शाहरुख खान तक नजर आ चुके हैं।

2. मिलिंद देवड़ा

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू होने से कुछ घंटे पहले 14 जनवरी को मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे। उन्होंने पार्टी छोड़ने पर कहा था कि जो पार्टी सुझाव देती थी कि देश को आगे कैसे ले जाया जाए, अब उसका एक ही लक्ष्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो भी कहते और करते हैं उसके खिलाफ बोलना। कल, अगर वह कहते हैं कि कांग्रेस एक बहुत अच्छी पार्टी है, वे इसका विरोध करेंगे। मिलिंद दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे मुरली देवड़ा के बेटे हैं। मिलिंद देवड़ा 2004 में पहली बार मुंबई दक्षिण से सांसद बने। 2009 में दूसरी बार जीते। 2011 में मनमोहन सिंह सरकार में संचार और सूचना प्रोद्योगिकी राज्य मंत्री बनाए गए। अक्तूबर 2012 में मनमोहन सरकार में कंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री बनाए गए। 2014 और 2019 में शिवसेना के अरविंद सावंत से हारे। इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी में संयुक्त कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। फिल्म निर्माता मनमोहन शेट्टी की बेटी पूजा शेट्टी से शादी की।

3. जगदीश शेट्टार

कर्नाटक में लिंगायत समाज के बड़े नेता जगदीश शेट्टार ने 25 जनवरी को कांग्रेस छोड़ भाजपा में वापसी कर ली थी। कर्नाटक विधानसभा से ठीक पहले अप्रैल 2023 में शेट्टार ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वे भाजपा से टिकट कटने से नाराज हो गए थे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा के महेश तेंगिनाकाई ने उन्हें 34,289 वोटों से हराया था। 80 के दशक में राजनीति की शुरुआत करने वाले शेट्टार 2012 से 2013 के बीच करीब दस महीनों के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे। इसके अलावा वह छह बार विधायक भी बने और भाजपा में कई पदों पर रहे। इनमें प्रदेश अध्यक्ष और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी शामलि है। 2008 में जब भाजपा ने राज्य में जीत दर्ज की थी, तब उन्हें कर्नाटक विधानसभा का स्पीकर भी बनाया गया था।

4. अरविंद नेताम

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम ने पिछले साल नौ अगस्त को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। वह किसी दूसरी पार्टी में भी शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने इस्तीफे पर कहा था, पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस पार्टी ने मुझे हाशिये पर रखा। जब मर्जी तब बुलाया, जब मर्जी तब दुत्कार दिया। कांग्रेस पार्टी के शासनकाल में भी आदिवासी हितों की उपेक्षा लगातार जारी रही। यही कारण है कि मैंने पार्टी की जगह समाज के लिए काम करना शुरू किया। मुझे कांग्रेस पार्टी ने नोटिस जारी किया, मैंने जवाब दिया तो पार्टी चुप्पी साध गई। एमए और एलएलबी के अलावा, लंदन से पर्यावरण का सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले अरविंद नेताम ने 1971 में अपना पहला चुनाव बस्तर की कांकेर लोकसभा सीट से लड़ा था, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की थी। तत्कालीन इंदिरा गांधी ने तब युवा नेताम को अपने मंत्रिमंडल में जगह दे दी। उस समय अरविंद नेताम को केंद्र सरकार में शिक्षा और समाज कल्याण और संस्कृति विभाग का उपमंत्री बनाया गया। 1980, 1984, 1989 और 1991 में भी अरविंद नेताम, कांकेर से सांसद चुने गए और अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष समेत पार्टी में कई जिम्मेदारियां संभालीं। 2003 में अरविंद नेताम ने कांग्रेस पार्टी छोड़ कर एनसीपी का दामन थाम लिया था लेकिन चार महीने में ही उनका एनसीपी से मोहभंग हो गया। 2004 में भाजपा में शामिल हो गए लेकिन यहां भी उनका मन नहीं माना। 2007 को वे फिर से कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।

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