
झील से निकले कचरे से बना नक्शा
मेघालय की उमियम झील से निकले 100 किलो पुराने जूते-चप्पलों का इस्तेमाल करके 'ईसीओ-आरआई' स्टार्टअप ने एक कलाकृति बनाई है, जिसका नाम 'द फुटस्टेप्स वी लीव बिहाइंड' है। यह कलाकृति हाल ही में '8इसोन' फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई। इसका उद्देश्य कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
शिलॉन्ग, एजेंसी। मेघालय की मशहूर उमियम झील को साफ करने के दौरान निकले कचरे से एक ऐसी कलाकृति बनाई गई है, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। पुराने जूते-चप्पल : राज्य के स्टार्टअप ‘ईसीओ-आरआई’ ने झील से निकले 100 किलो पुराने जूते-चप्पलों का इस्तेमाल करके भारत के उत्तर-पूर्व का एक बड़ा नक्शा तैयार किया है। इस शानदार कलाकृति को ‘द फुटस्टेप्स वी लीव बिहाइंड’ नाम दिया गया है और इसे हाल ही में ‘8इसोन’ फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। नक्शा बनाने के लिए 70 फीसदी से ज्यादा बेकार सामान, जैसे पुराने प्लाईवुड और जूतों का इस्तेमाल किया गया है। 100 किलो कचरा यह दर्शाता है कि भारत में हर 3 मिनट में इतना जूते-चप्पलों का कचरा पैदा होता है।
जूते रीसायकल करना सबसे कठिन है, क्योंकि इसमें रबर, कपड़ा और गोंद का मिला-जुला इस्तेमाल होता है। क्यों खास है यह प्रोजेक्ट : इस प्रोजेक्ट का मकसद लोगों को यह बताना है कि हमारा फेंका हुआ कचरा कैसे झीलों और जंगलों को बर्बाद कर रहा है। स्टार्टअप से जुड़े लोगों का मानना है कि प्लास्टिक कचरा कोई समस्या नहीं, बल्कि एक अवसर है। यह संगठन प्लास्टिक और अन्य कचरे को घर की सजावट के सामान और फर्नीचर में बदल देता है। इनका लक्ष्य लोगों की सोच बदलना है।

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