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एक से अधिक बार चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाले लिंगदोह समिति की सिफारिश पर केंद्र व यूजीसी से मांगा जवाब

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान...

एक से अधिक बार चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाले लिंगदोह समिति की सिफारिश पर केंद्र व यूजीसी से मांगा जवाब
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMon, 12 Feb 2024 06:30 PM
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नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें लिंगदोह समिति की उस सिफारिश को चुनौती देने दी गई है, जिसमें कहा गया है कि एक छात्र छात्र संघ के पदाधिकारी पद के लिए एक से अधिक बार चुनाव नहीं लड़ सकता है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में लिंगदोह समिति द्वारा एक से अधिक बार छात्र संघ का चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की सिफारिश को मनमाना और अनुचित बताते हुए, इसे रद्द करने की मांग की है।

जस्टिस सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ ने याचिका पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार, यूजीसी और अन्य संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छात्र राजनीति में अपराधीकरण और धन बल को दूर करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में आयोजित छात्र छात्र संघ चुनावों से संबंधित मुद्दों पर सुझाव देने के लिए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने 26 मई, 2006 को अपनी रिपोर्ट पेश की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिंगदोह समिति की सिफारिश को स्वीकार किए जाने के बाद पूरे देशभर के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के छात्र संघ के चुनाव के लिए लागू किया गया। उत्तराखंड निवासी नवीन प्रकाश नौटियाल और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लिंगदोह समिति की सिफारिश 6.5.6 को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि छात्र संघ चुनाव में कोई छात्र पदाधिकारी के पद के लिए सिर्फ एक बार चुनाव लड़ सकता है, जबकि कार्यकारी सदस्य के पद के लिए चुनाव लड़ने के दो अवसर मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि समिति ने इस विशेष सिफारिश के बारे में कोई समुचित कारण नहीं बताया और न ही इस बारे में किसी तरह की चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान न सिर्फ पूरी तरह से ‌मनमाना और भेदभावपूर्ण, बल्कि अनुचित भी है। अधिवक्ता भूषण ने पीठ से कहा कि समिति का गठन का मकसद छात्र राजनीति से आपराधिक मानसिकता और धनबल को दूर करना था। उन्होंने पीठ से कहा कि यदि कोई छात्र एक बार चुनाव जीत जाता है और उस पर आगे चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो समझ में आता है, लेकिन यदि कोई चुनाव नहीं जीता है तो उसे लड़ने पर प्रतिबंध लगाना अनुचित होगा।

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