जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए मास्टर प्लान बनाने की जरूरत : अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाढ़ और लू से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने जलवायु चुनौतियों के समाधान के लिए मास्टर प्लान बनाने की आवश्यकता बताई। एनडीएमए की मदद से 60 उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए चेतावनी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया। जल संरक्षण के लिए चेक डैम परियोजनाओं पर भी जोर दिया।

- केंद्रीय गृहमंत्री ने बाढ़ और लू से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को उच्चस्तरीय बैठक में देश में संभावित बाढ़ और लू से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए मास्टर प्लान बनाने की जरूरत बताई। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन में 'शून्य जनहानि' का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया।
चेतावनी प्रणाली का विकास
अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की मदद से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल, अरुणाचल और सिक्किम की 30 उच्च जोखिम वाली झीलों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना में 60 झीलों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के स्तर पर बाढ़ पूर्वानुमान के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक राज्य में फ्लड क्राइसिस मैनेजमेंट टीम (एफसीएमटी) गठित कर उन्हें सक्रिय किया जाए। उन्होंने एनडीएमए को यह अध्ययन करने का निर्देश भी दिया कि कितने राज्य जंगल की आग, लू और बाढ़ से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के निर्देशों और एनडीएमए के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
चेक डैम परियोजनाओं पर जोर
केंद्रीय गृहमंत्री ने जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने के लिए जल भंडारण एवं चेक डैम परियोजनाओं की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदियों पर चेक डैम बनाकर जल संरक्षण के साथ-साथ लू के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सीएएमपीए फंड का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।
मौसम पूर्वानुमान की सटीकता महत्वपूर्ण
अमित शाह ने जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के बदलते स्वरूप और उससे उत्पन्न आपदा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी मानसून के बेहतर आकलन के लिए मानसून के दौरान होने वाली मौतों, मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान का अध्ययन किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र की ताकत टकराव में नहीं, बल्कि संतुलन- सम्मान में
अमित शाह ने रविवार को कहा कि लोकतंत्र की ताकत टकराव में नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन और आपसी सम्मान में निहित है। तुषार मेहता द्वारा लिखी गई दो किताबों 'द बेंच, द बार एंड द बिजार' और 'द लॉफुल एंड द ऑफुल' के विमोचन के मौके पर अमित शाह ने कहा कि लेखक न केवल भारत के सॉलिसिटर जनरल और एक जानकार वकील हैं, बल्कि मेरे दोस्त भी हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और न्यायपालिका ने भारत के लोकतंत्र की जड़ों को गहरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गृहमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की ताकत टकराव से नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन और आपसी सम्मान से आती है। जब मैं आपसी सम्मान की बात करता हूं, तो हमारे संविधान ने कई जगहों पर इस भावना को स्वीकार किया है, जिसे हम सभी ने देखा भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस भावना को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती यह है कि संविधान ने संस्थाओं का निर्माण टकराव के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे को संतुलित करने के लिए किया है। कार्यपालिका निर्णय लेती है और न्यायपालिका उसकी न्यायिक समीक्षा करती है।
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