आठ साल से बिना मान्यता के चल रही थी अल फलाह यूनिवर्सिटी

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में लाल किले के पास धमाके के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता की जांच शुरू हुई। यूनिवर्सिटी की मान्यता 2018 में समाप्त हो चुकी थी, फिर भी छात्रों को दाखिला दिया गया। यूजीसी की शिकायत पर अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया। ईडी ने 43 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।

आठ साल से बिना मान्यता के चल रही थी अल फलाह यूनिवर्सिटी

नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली में लाल किले के पास धमाके के बाद चर्चाओं में आई अल फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि विश्वविद्यालय की वैध मान्यता 2018 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय विभिन्न मंचों पर पुरानी मान्यता को ही दिखाकर छात्रों का दाखिला करता रहा। इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की शिकायत के बाद दो मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। गुरुवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। बताया कि फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ यूजीसी ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी।

बताया कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 27 जनवरी को जवाद को गिरफ्तार किया था। अदालत में पेश करने के बाद चार दिन की रिमांड के दौरान सिद्दीकी से यूनिवर्सिटी में संचालित बीएड और इंजीनियरिंग समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों की मान्यता के बारे में पूछताछ की गई। 31 जनवरी को अदालत ने सिद्दीकी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच में पता चला है कि यूनिवर्सिटी को यूजीसी से जो मान्यता मिली थी, उसकी वैध अवधि 2018 तक ही थी। लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसके बाद भी वेबसाइट और अन्य प्रचार सामग्रियों पर खुद को यूजीसी मान्यता प्राप्त दिखाना जारी रखा और विभिन्न पाठ्यक्रमों में छात्रों को दाखिला दिया जाता रहा। बताया कि मान्यता के संबंध में जांच जारी है। झूठे दावे कर 43 करोड़ की कमाई दिल्ली धमाके से यूनिवर्सिटी के तार जुड़ने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नवंबर में सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। यह मामला धनशोधन से जुड़ा हुआ था। उस दौरान ईडी ने कोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी ने मान्यता संबंधी झूठे दावे करके छात्रों को एडमिशन लेने के लिए प्रेरित किया। इसके जरिए 45 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक कमाई की गई। जनवरी में ईडी ने आरोपपत्र दाखिल करने के साथ यूनिवर्सिटी की 139.97 करोड़ की संपत्तियों को अटैच कर दिया था। साकेत कोर्ट में 13 को होगी सुनवाई ईडी की ओर से दायर आरोपपत्र पर विचार के लिए दलीलों की सुनवाई 13 फरवरी को होनी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान की अदालत ने सिद्दीकी के वकील की दलीलें सुनने के बाद मामले को विचार के लिए सूचीबद्ध किया है। सिद्दीकी के वकील ने आरोपपत्र के साथ दायर दस्तावेजों की जांच के लिए अदालत से समय मांगा था। पारिवारिक संस्थाओं से विदेश भेजी रकम ईडी ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान कई डिजिटल दस्तावेज, उपकरण, कागजात बरामद किए गए। इनकी जांच में सामने आए पहलू इशारा कर रहे हैं कि यूनिवर्सिटी के संस्थागत फंड को सिद्दीकी के परिवार द्वारा नियंत्रित दूसरी संस्थाओं के माध्यम से विदेश भेजा गया। एजेंसियां वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं। यूनिवर्सिटी में तैनात रहे डॉक्टरों का आतंकी मॉड्यूल से जुड़ाव पुलिस अधिकारी ने बताया कि 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके में अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल इंस्टीट्यूट से जुड़े तीन डॉक्टरों का नाम संदिग्धों के तौर पर सामने आया था। इसके बाद ही यह यूनिवर्सिटी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आ गई थी। संदिग्ध डॉक्टरों पर धमाके में शामिल एक आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा होने का आरोप था। इनमें उमर नबी भी शामिल था, जो कथित तौर पर उस कार को चला रहा था, जिसमें लाल किले के पास धमाका हुआ था। नबी यूनिवर्सिटी में जनरल मेडिसिन का असिस्टेंट प्रोफेसर था। इसके अलावा विश्वविद्यालय में तैनात रहे डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद को भी जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर मॉड्यूल में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया।

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