
मेडिकल कॉलेज को कोर्ट के आदेश पर मिली मान्यता : आरती राव
फरीदाबाद में अल-फलाह मेडिकल कॉलेज को मान्यता अदालत के आदेश पर दी गई थी। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता 2019 में मिली थी और अब इसकी जांच की जा रही है। अभिभावकों की चिंता बढ़ी है, खासकर दिल्ली बम धमाके के बाद।
फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। अल-फलाह मेडिकल कॉलेज को मान्यता अदालत के आदेश पर दी गई थी। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने गुरुवार को राजा नाहर सिंह क्रिकेट स्टेडियम के समीप निर्मित पैरा भवन के उद्घाटन के मौके पर ये बात कही। उन्होंने बताया कि सरकार ने सीधे तौर पर मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं दी थी। अब पूरे मामले की जांच की जा रही है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनकी जांच सरकार कर रही है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी को वर्ष 2014 से पहले मान्यता मिली थी, जबकि मेडिकल कॉलेज को 2019 में मान्यता दी गई थी।
यह संस्थान उच्च शिक्षा के तहत आता है, मेडिकल शिक्षा के तहत नहीं। मंत्री ने कहा कि अब यह पता लगाया जा रहा है कि यहां कितने सेल सक्रिय हैं और उनका संचालन कैसे हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़े-लिखे लोग ऐसी गतिविधियों में क्यों शामिल हो रहे हैं, यह चिंता का विषय है। अभिभावकों की बढ़ी चिंता दिल्ली बम धमाके में अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आने के बाद से उसमें पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों को अपने बेटे-बेटियों के भविष्य की चिंता सता रही है। छात्रों के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर आरती राव ने कहा कि सभी प्रकार की जांच पूरी होने के बाद सरकार की ओर से अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में फैसला लिया जाएगा। 2014 में निजी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला अल-फलाह समूह ने शिक्षा संस्थानों का संचालन वर्ष 1997 में शुरू किया था। वर्ष 2009 में समूह स्वायत्त बना और 2014 में इसे प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। दावा है कि यूनिवर्सिटी को यूजीसी की धारा 2(एफ) और 12(बी) के तहत मान्यता प्राप्त है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. भूपिंदर कौर आनंद ने बताया कि अल-फलाह अस्पताल 2014 से सेवाएं दे रहा है, जबकि मेडिकल कॉलेज का संचालन 2019 से शुरू हुआ। यहां से एमबीबीएस पास कर चुके डॉक्टर देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2023 में यूनिवर्सिटी में एमडी, एमएस की पढ़ाई भी शुरू की गई। 1995 में हुई थी चैरिटेबल ट्रस्ट की शुरुआत अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी, जिसमें जावेद अहमद सिद्दीकी शुरुआती ट्रस्टियों में से एक थे और प्रबंध न्यासी के रूप में नियुक्त किए गए थे। ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित सभी शैक्षणिक संस्थानों का वित्तीय नियंत्रण उन्हीं के हाथों में था। 1990 के दशक के बाद संस्थान तेजी से फला-फूला।

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