
लापरवाही: बिना प्रमाणपत्र उड़ान भरता रहा एयरबस-320
एयर इंडिया की एक और लापरवाही सामने आई है जब एक ए-320 विमान बिना वैध एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट के कई उड़ानें भरी। मामले का खुलासा होने पर कंपनी ने मेंटेनेंस इंजीनियर को ग्राउंडेड किया और पायलटों के खिलाफ समिति गठित की। डीजीसीए ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है।
मुंबई, एजेंसी। विमान कंपनी एयर इंडिया की एक और लापरवाही सामने आई है। एयर इंडिया का एयरबस ए-320 बिना वैध एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (एआरसी) के ही कई शहरों के बीच उड़ान भरता रहे। सूत्रों ने ये जानकारी दी है। मामले का खुलासा होने के बाद कंपनी ने एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर को ग्राउंडेड कर दिया है। वहीं विमान उड़ाने वाले छह से आठ पायलटों के खिलाफ कार्रवाई के लिए समिति गठित की है। सूत्रों के अनुसार चार साल पुराना ए-320 नियो एयरक्राफ्ट वीटी- टीएनक्यू विस्तारा की फ्लीट में था। उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र एक्सपायर होने के चलते ये सभी विमान खड़े हैं।

24 नवंबर को विमान कंपनी ने विमान को उड़ाने का फैसला किया और दिल्ली में उड़ान भरी। इसी दिन दिल्ली- बेंगलुरु- मुंबई सेक्टर में वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन किया गया। 25 नवंबर को विमान ने मुंबई- दिल्ली- मुंबई, मुंबई- हैदराबाद- मुंबई और फिर मुंबई- हैदराबाद- मुंबई के बीच उडान भरी। सूत्रों के अनुसार मामले का खुलासा होने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) इस घटना की जांच में जुटा है। डीजीसीए ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि विमान ने आठ वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिना एआरसी के उड़ान भरी। डीजीसीए ने इस संबंध में विमान कंपनी को खुद मामले की जांच करने का आदेश देते हुए चेताया है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं हो। विमान को उसी दिन मेंटेनेंस के लिए भेजा सूत्रों का कहना है कि उड़ान के बाद विमान को उसी दिन मेंटेनेंस के लिए भेजा गया। विमान मेंटेनेंस के लिए पहुंचा तो इंजीनियर को पता चला कि इसका तो एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है। इसके बाद विमान कंपनी ने मेंटेनेंस इंजीनियर को रोस्टर से हटा दिया। मामले की जांच करने और संबंधित पायलटों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में फैसला लेने के लिए कंपनी ने एक समिति गठित कर दी है। बाद में पायलटों को याद दिलाई जिम्मेदारी सूत्रों का कहना है कि मामला खुलने के बाद एयर इंडिया के उड़ान संचालन निदेशक मनीष उप्पल ने सोमवार को सभी पायलटों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए प्रमाणपत्रों की वैधता जांचने को कहा था। हालांकि अब कुछ पायलटों का दावा है कि एयरबस-320 नियो के उड़ान संबंधी उल्लंघन के मामले में ये जिम्मेदारी से बचने का तरीका है। एयर इंडिया ने कोई बयान नहीं दिया है। पायलटों ने रखा अपना पक्ष पायलटों का कहना है कि विमान के उड़ान भरने के दौरान उनके पास 27 तरह के कागजात रहते हैं। अगर पायलट इंजीनियरिंग विभाग की बजाए खुद इन कागजातों की जांच करें तो इसके लिए उन्हें कम से कम 30 मिनट का अतिरिक्त समय मिलना चाहिए। क्या होता है उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र? डीजीसीए हर साल उड़ान योग्यता प्रमाण पत्र जारी करता है। इस पत्र में पुष्टि की जाती है कि विमान का जरूरी रखरखाव किया गया है और विमान उड़ान के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके बिना विमान उड़ाना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

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