एआई डाक्टरों का विकल्प नहीं, लेकिन उनकी क्षमता बढ़ाने में सक्षम
स्वास्थ्य देखभाल में एआई तकनीकों का तेजी से उपयोग बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीकें डॉक्टरों की भूमिका को प्रतिस्थापित नहीं करेंगी, बल्कि उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाएंगी। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का विकास हो रहा है, जिससे बीमारी की पहचान और इलाज में तेजी आ रही है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। स्वास्थ्य देखभाल में एआई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीकें डाक्टर और तकनीशियन की जगह नहीं ले सकती हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से उनकी कार्यक्षमता में इजाफा हो सकता है। एआई तकनीकें बीमारियों की जांच और जल्द पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे स्वास्थ्य तंत्र की पहुंच भी बढ़ेगी। लेकिन एआई तकनीकों से मिलने वाली सूचनाओं के बावजूद बीमारी के निर्धारण में अंतिम निर्णय डाक्टर का ही होगा। समिट के पहले दिन सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर परिचर्चा की गई।
इस दौरान नेशनल हेल्थ अथारिटी के सीईओ डा. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल में एआई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे बीमारियों की जांच और पहचान में तेजी आ रही है तथा दायरा विस्तृत हो रहा है। नतीजा यह है कि स्वास्थ्य तंत्र की पहुंच बढ़ रही है। कैंसर जैसी बीमारियों की जांच जल्दी होन से उपचार जल्दी शुरू हो सकता है। लेकिन मरीज के उपचार का मुद्दा बेहद संवेदनशील है, इसलिए एआई तकनीकी के बावजूद डाक्टर और तकनीशियन की भूमिका निर्णायक बनी रहेगी। अलबत्ता तकनीकें उनकी क्षमता को बढ़ा देंगी। अगले कुछ सालों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखेगा। स्वास्थ्य सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले दशक में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली बुनियादी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और बेहतर डेटा रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सुगम डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की ओर अग्रसर हुई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें 85.9 करोड़ से अधिक एबीएचए खाते 87.8 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य अभिलेखों से जुड़े हुए हैं। देश भर में 1.80 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर डिजिटल प्लेटफार्मों को एकीकृत किया जा रहा है। एआई-सहायता प्राप्त क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) द्वारा संचालित ई-संजीवनी ने 2.2 लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के माध्यम से 44.9 करोड़ से अधिक टेलीकंसल्टेशन किए हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञ डा. गीता मंजूनाथ ने स्तर कैंसर की जांच के लिए विकसित एआई टूल का ब्यौरा देते हुए कहा कि किस प्रकार सफलतापूर्वक राज्यों में इसके पायलट प्रोजक्ट शुरू किए गए हैं और सिर्फ एक चित्र के जरिये कोशिकाओं की गतिविधियों को देखकर एआई टूल स्तन कैंसर की जांच करता है। डा. आनंद शिवरमन ने रेटिना की स्कैनिंग के जरिये डाइबिटिक रेटिनोपैथी और अन्य बीमारियों की पहचान करने वाले भारत में विकसित एआई टूल का जिक्र किया जिसका इस्तेमाल भारत के साथ अमेरिका में भी हो रहा है। एम्स और पीजीआई में एआई उत्कृष्टता केंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र सरकार ने एम्स दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की है। कहा कि डिजिटल प्रणालियों द्वारा संग्रह किए गए डाटा की एआई बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्या करता है। एआई में स्वास्थ्य कार्यबल पर बोझ कम करने और चिकित्सक-रोगी संबंध को मजबूत करने की क्षमता है, न कि इसे प्रतिस्थापित करने की। इस संदर्भ में उन्होंने एआई-आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग के लिए मधुनेत्र एआई, तपेदिक का पता लगाने के लिए एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे और कफ अगेंस्ट टीबी (सीए-टीबी) जैसे ध्वनिक स्क्रीनिंग उपकरणों, और तेजी से महामारी संबंधी अलर्ट के लिए एआई-एकीकृत निगरानी प्रणालियों का उल्लेख किया।

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