एआई की मदद से खतरे वाले इलाकों को किया जाएगा चिह्नित
सुरक्षा एजेंसियां भविष्य में एआई की मदद से खतरे वाले इलाकों को चिह्नित करके अपनी सुरक्षा रणनीति तैयार करेंगी। एआई आधारित सुरक्षा पर काम हो रहा है, जिसमें अपराध डेटा विश्लेषण और संभावित खतरों की पहचान शामिल है। योजना सफल रहने पर हर जिले का 'थ्रेट स्कोर' तय किया जा सकेगा।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुरक्षा एजेंसियां भविष्य में एआई की मदद से खतरे वाले इलाकों को चिह्नित करके अपनी सुरक्षा रणनीति तैयार करेंगी। सुरक्षा के लिए एआई के बेहतर उपयोग को लेकर विशेषज्ञों की मदद से कई स्तरों पर काम हो रहा है। एक अधिकारी ने कहा हमने विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है जिसमे भविष्य की रणनीति का खाका है। इसमें एआई आधारित सुरक्षा अहम है। हम कई स्तरों पर काम कर रहे हैं। इसमें अपराध डेटा विश्लेषण से लेकर संभावित खतरों की पहचान और इसके आधार पर सुरक्षा बलों की तैनाती करना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि योजना कारगर रही तो एआई का उपयोग करके देश के प्रत्येक जिले का उसकी सुरक्षा स्थिति के आधार पर ‘थ्रेट स्कोर’ तय हो सकता है। इसकी मदद से एजेंसियों को पता चलेगा कि किस जिले या इलाके में अपराध या आतंक, उग्रवाद, कट्टरपंथ आदि से जुड़ी चुनौतियां ज्यादा या कम हैं। इसमें डेटा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी।
एआई प्रयोगों की प्रक्रिया
एक अधिकारी ने कहा हम एक्सपर्ट की मदद से तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं कि कैसे एआई सुरक्षा योजना कारगर बनाई जा सके। यह प्रणाली राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अपराध आंकड़ों, सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों, सांप्रदायिक तनाव, भीड़भाड़ वाले आयोजनों, पुराने दंगों, नक्सल गतिविधियों और स्थानीय खुफिया सूचनाओं का डेटा आधारित गहन विश्लेषण कर किसी जिले को कम, मध्यम या उच्च जोखिम की श्रेणी में रख सकेगी। रियल टाइम डेटा के आधार पर यह लगातार अपडेट होता रहेगा। दुनिया के कई देशों में एआई आधारित तकनीक के अलग-अलग प्रयोग हो चुके हैं। अमेरिका के शिकागो और लॉस एंजेलिस में ‘प्रीडिक्टिव पुलिसिंग’ मॉडल अपनाया गया। चीन में भी कई जगहों पर एआई निगरानी नेटवर्क संचालित हो रहा हैं।
भारत में तकनीकी चुनौतियां
भारत में फिलहाल स्मार्ट सिटी निगरानी केंद्र, ड्रोन सर्विलांस और फेस रिकग्निशन जैसी तकनीकों पर काम हो रहा है, लेकिन पूरे देश के लिए ‘थ्रेट स्कोर’ प्रणाली अवधारणा और प्रारंभिक प्रयोग के स्तर पर मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक में डेटा सुरक्षा, निजता और गलत अलर्ट जैसी चुनौतियां भी हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आगे की रणनीति तय होगी।
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