रिपोर्ट: एआई का 'डिजिटल दिमाग' डकार रहा आपका डाटा
अगर आपका 1.5जीबी या 2जीबी का डाटा पैक जल्दी खत्म हो रहा है, तो इसका कारण केवल रील देखने या यूट्यूब नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड गेमिंग है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में औसत भारतीय हर महीने 31जीबी डाटा खर्च करेगा, और 5जी का योगदान 47% होगा।

अगर आपको लग रहा है कि आपका 1.5जीबी या 2जीबी का डेली डाटा पैक आजकल जल्दी खत्म हो रहा , तो दोष सिर्फ रील देखने या यूट्यूब को मत दीजिए। असल में, आपके मोबाइल के भीतर बैठा 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (एआई) का दिमाग अब आपके डाटा को डकार रहा है। नोकिया की ताजा रिपोर्ट (एमबीआईटी 2025) ने पहली बार यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि भारत में डाटा खपत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एआई ऐप्स और क्लाउड गेमिंग हैं। एक साधारण गूगल सर्च के मुकाबले, किसी एआई चैटबॉट (जैसे चैट जीपीटी या जैमिनी) से एक सवाल पूछने में लगभग 10 गुना ज्यादा डाटा और प्रोसेसिंग पावर खर्च होती है।
यही वजह है कि जैसे-जैसे हम 'स्मार्ट' हो रहे हैं, हमारा डाटा पैक 'दुबला' होता जा रहा है।31 जीबी की 'डिजिटल डाइट'रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में एक औसत भारतीय हर महीने 31जीबी डाटा इस्तेमाल कर रहा है। पिछले साल यह आंकड़ा 27.5 जीबी था। यानी हर भारतीय अब रोज लगभग 1जीबी डाटा खर्च कर रहा है, लेकिन समझने वाली बात यह है कि यह डेटा जा कहां रहा है?5जी का बढ़ता दबदबानोकिया की रिपोर्ट कहती है कि देश के कुल मोबाइल ट्रैफिक में 47% हिस्सेदारी अब 5जी की है। बजट 5जी फोन की बाढ़ ने गांव-गांव तक 'सुपरफास्ट' इंटरनेट पहुंचा दिया है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन चुका है।कैसे 'दिमाग' खाता है डाटा?अब तक हम इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ 'देखने' (स्ट्रीमिंग) के लिए करते थे, लेकिन अब हम 'सोचने' (प्रोसेसिंग) के लिए कर रहे हैं। इसे इन तीन तरीकों से समझिए:-1. एआई से 'बनवाना' बनाम 'देखना': जब आप किसी एआई टूल से कहते हैं कि मेरे लिए एक पेंटिंग बनाओ या इस फोटो को वीडियो में बदल दो, तो वह टूल बैकग्राउंड में हजारों पिक्सल्स को प्रोसेस करता है। एक साधारण वीडियो चलाने के मुकाबले एआई से कुछ 'नया बनवाना' कई गुना ज्यादा डाटा खर्च करता है।2. क्लाउड गेमिंग का 'रिमोट दिमाग': आजकल भारी भरकम गेम्स आपके फोन की मेमोरी में नहीं, बल्कि दूर किसी सर्वर के 'दिमाग' में चलते हैं। आपका फोन सिर्फ एक स्क्रीन की तरह काम करता है। गेम का हर एक्शन (जैसे गोली चलाना या मुड़ना) रियल-टाइम में प्रोसेस होकर वापस आता है, जो डेटा की भारी खपत करता है।3. स्मार्ट फीचर्स की 'चुपचाप' खपत: आपके फोन के ऐप्स अब बैकग्राउंड में एआई का इस्तेमाल करते हैं। फोटो में चेहरों को पहचानना, मैप्स पर ट्रैफिक का सटीक अंदाजा लगाना या वीडियो की क्वालिटी को एआई के जरिए बढ़ाना -ये सब 'दिमागी कसरत' आपके डेटा पैक पर भारी पड़ रही है।
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