घर खरीदने में अब पहले के मुकाबले अधिक लोग सक्षम

Dec 26, 2025 04:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कम फाइनेंसिंग लागत, बढ़ती आय से मदद मिली, हालांकि कीमतें बढ़ रहीं नाइट फ्रैंक इंडिया

घर खरीदने में अब पहले के मुकाबले अधिक लोग सक्षम

हि विशेष.. मिंट का लोगो लगाएं मधुरिमा नंदी नई दिल्ली। घर खरीदने में लोग अब पहले के मुकाबले अधिक सक्षम हुए हैं। इसका प्रमुख कारण फाइनेंस की कम लागत और बढ़ती आय है। प्रॉपर्टी सलाहकार नाइट फ्रैंक इंडिया के नए अफॉर्डेबिलिटी इंडेक्स के अनुसार, घर खरीदारों के लिए अहमदाबाद बड़े शहरों में सबसे किफायती बाजार बना हुआ है, जिसके बाद पुणे और कोलकाता का नंबर आता है। हालांकि घर की कीमतें बीते तीन सालों में काफी बढ़ी हैं। अधिक आय और होम लोन की कम दरों ने सामर्थ्य बढ़ाया देशभर में आवासीय घरों की मांग मजबूत बनी हुई है। घरों की कीमतें बढ़ने के बावजूद, मुंबई सहित कुछ शहरों में घर खरीदारों के लिए स्थितियां बेहतर हो रही है।

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नाइट फ्रैंक के इंडेक्स के अनुसार 2010 से शीर्ष आठ शहरों में लगातार सुधार दिख रहा है। यह इंडेक्स ईएमआई पर खर्च होनेवाली घरेलू आय के अनुपात को मापकर तैयार किया गया है। घर खरीदने का सामर्थ्य होने की तीन प्रमुख वजहें हैं, औसत कीमत, आय का स्तर और आवास ऋण की कम ब्याज दरें। बेहतर आय स्तर और कम ब्याज दरों ने घर खरीदने की सामर्थ्य को मजबूत किया है। आरबीआई की रेपो रेट में कटौती से मदद मिली इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती करके इसे 5.25% कर दिया। इस कदम से इस साल रेपो रेट में कुल 125 अंकों की कमी हुई है। इससे खरीदारों के जोश में बढ़ोतरी हो रही है, खासकर पहली बार घर खरीदने वालों के लिए। इससे पहले से ही तेजी से बढ़ते आवासीय क्षेत्र में बिक्री की गति और मजबूत हो रही है। किफायती और मध्यम वर्ग आवास क्षेत्र को आमतौर पर सबसे ज्यादा फायदा होता है क्योंकि वे उधार लेने की लागत के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। अहमदाबाद में घर खरीदना सबसे आसान देशभर में बड़े आठ शहरों में अहमदाबाद सबसे किफायती शहर बना हुआ है। इसके उलट एनसीआर में घर खरीदना मुश्किल हुआ है। पिछले साल के दौरान एनसीआर क्षेत्र में किफायती होने में गिरावट दर्ज की। अहमदाबाद में किस्त के मुकाबले आय अनुपात 18 फीसदी है। इसका मतलब है कि अगर अहमदाबाद में रहने वाला कोई परिवार औसतन 100 रुपये कमाता है, तो उसका केवल 18 रुपये घर की किश्त में जाता है। दूसरे स्थान पर पुणे और फिर कोलकाता हैं। मुंबई में घर खरीदने की क्षमता में पहले के मुकाबले सुधार हुआ है। 2025 में किस्त के मुकाबले आय अनुपात घटकर 47% हो गया। महामारी के बाद से मुंबई में किफायती स्तर में सुधार हुआ है। घरों की कीमतें बढ़ रहीं प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग, साथ ही बढ़ते लागत और निर्माण खर्च ने भी हाल के सालों में कीमतों को बढ़ाया है। 1.5 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा कीमत वाले घरों में 2022 और 2025 के बीच औसत कीमत में 40% की बढ़ोतरी देखी गई। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस श्रेणी के घरों में सबसे तेजी से कीमत बढ़ी। असल में, 40 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये के बीच कीमत वाले मध्यम आय वाले और प्रीमियम घरों में 39% की अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। बजट वाले घर अब कम बन रहे किफायती घर मिलना अभी भी थोड़ा मुश्किल है। पिछले तीन सालों में सुस्त मांग और आपूर्ति के बीच औसत कीमत में 26% की बढ़ोतरी हुई। डेवलपर्स ज्यादातर प्रीमियम घरों पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे बजट वाले घर पीछे छूट गए हैं। यह चलन 2026 में भी जारी रहेगा। बड़े डेवलपर्स बिक्री के लक्ष्यों को पूरा करने की होड़ में हैं, जिन्हें केवल प्रीमियम आवास के जरिए ही हासिल किया जा सकता है जो तेजी से बिकते हैं और बेहतर लाभ सुनिश्चित करते हैं। बढ़ती आय और बेहतर ऋण दरों के कारण अगले साल भी घर खरीदारों की क्षमता में सुधार हो सकता है, लेकिन इससे तभी असली फर्क पड़ेगा जब बाजार बजट में घर खरीदने के लिए ज्यादा विकल्प देगा। देश के आठ शहरों में अफॉर्डेबिलिटी इंडेक्स किस्त बनाम आय अनुपात (प्रतिशत में) 2010 2020 2025 मुंबई 93 61 47 एनसीआर 53 38 28 बेंगलुरु 48 28 27 पुणे 39 26 22 चेन्नई 51 26 23 हैदराबाद 47 31 30 कोलकाता 45 30 22 अहमदाबाद 46 24 18 स्रोत: नाइट फ्रैंक इंडिया रिसर्च

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