पश्चिम एशिया संघर्ष से समुद्री चुनौतियां बढ़ी: नौसेना प्रमुख

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने कमांडर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण बढ़ती समुद्री चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने भारत की ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका और समुद्री यातायात में बाधाओं के प्रभाव की चर्चा की, साथ ही भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।

पश्चिम एशिया संघर्ष से समुद्री चुनौतियां बढ़ी: नौसेना प्रमुख

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने बुधवार को कमांडर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ती समुद्री चुनौतियों और वैश्विक सुरक्षा की परस्पर जुड़ी प्रकृति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस संकट के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में नौसेना की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। नौसेना भवन में आरंभ हुए कमांडर सम्मेलन के पहले दिन बल के शीर्ष कमांडरों को संबोधित करते हुए एडमिरल डीके त्रिपाठी ने बताया कि समुद्री यातायात में बाधाएं इस बात का संकेत हैं कि सुरक्षा लगातार और कठोर बनी रहती है।

किसी क्षेत्रीय संघर्ष के प्रभाव सीमित नहीं रहते। इस संदर्भ में नौसेना की सतर्कता और परिचालन क्षमता की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ी है।नौसेना प्रमुख ने उभरती प्रौद्योगिकियों, युद्ध-तैयारी और भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भारत की समुद्री प्रतिबद्धताओं को दोहराते हुए बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की ओर संकेत किया, जहां प्रतिस्पर्धा तेजी से संघर्ष में बदल रही है। उन्होंने कहा कि समवर्ती संघर्ष, विरोधियों की बढ़ती क्षमताएं और गैर-राज्य तत्वों की सक्रियता के कारण समुद्री सुरक्षा वातावरण जटिल हो गया है। इसके बीच भारतीय नौसेना को युद्ध-तैयार, विश्वसनीय और भविष्य उन्मुख बल के रूप में निरंतर खुद को मजबूत करना होगा।

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