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नई दिल्ली

रेलिगेयर के धन गबन मामले में आरोपी शिविंदर सिंह की जमानत रद्द

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Newswrap
Mon, 14 Jun 2021 06:30 PM
रेलिगेयर के धन गबन मामले में आरोपी शिविंदर सिंह की जमानत रद्द

सख्ती

- निचली अदालत के फैसले को रेलिगेयर ने दी थी चुनौती

- उच्च न्यायालय ने माना, गबन हुए रुपयों का पता लगाने के लिए हिरासत जरूरी

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) के 2397 करोड़ रुपये गबन किए जाने के मामले में आरोपी शिविंदर मोहन सिंह की जमानत सोमवार को खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के द्वारा रची गई साजिश और गबन किए गए रुपयों का पता लगाने के लिए उसे हिरासत में रखना जरूरी है। शिवंदर मोहन सिंह को जमानत देने के निचली अदालत के तीन मार्च के आदेश को आरएफएल की तरफ से चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने आरएफएल की याचिका पर यह फैसला दिया। इस याचिका में कहा गया था कि आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) ने शिविंदर के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया है। आरएफएल की याचिका को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि मौजूदा मामले में आरोपी शिविंदर के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और गंभीरता संगीन है। पीठ ने निचली अदालत से शिविंदर को मिली जमानत को खारिज करते हुए 29 पन्नों के फैसले में कहा कि धोखाधड़ी में एक एजेंट द्वारा इतने अधिक रुपयों के हितों के आपराधिक उल्लंघन के मामले में जमानत देने से न सिर्फ मामले की जांच प्रभावित होती है, बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली पर भी असर पड़ता है।

न्यायमूर्ति कैत ने कहा कि शिविदंर सिंह को हिरासत में रखना न सिर्फ उसके द्वारा रची गई साजिश का पता लगाने के लिए जरुरी है, बल्कि गबन किए गए रुपयों का पता लगाने के लिए भी आवश्यक है।

इस मामले में आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि मनप्रीत सूरी ने शिविंदर, रेलीगेर एंटरप्राइजेस लिमिटिड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी, आरईएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा व अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस को शिकायत दी थी। इन पर आरोप लगाया गया था कि जब ये कंपनी के प्रबंधन का काम संभाल रहे थे तब कर्ज लेकर उसका निवेश दूसरी कंपनियों में कर दिया था। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मार्च 2019 में प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में बताया गया था कि आरोपियों ने 2397 करोड़ रुपये का घोटाला किया है।

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