Hindi NewsNcr NewsDelhi News59 27 Unregistered Political Parties in Bihar Fail to Disclose Financial Information for FY 2023-24
59% अपंजीकृत पार्टियों ने नहीं दी वित्तीय जानकारी : एडीआर

59% अपंजीकृत पार्टियों ने नहीं दी वित्तीय जानकारी : एडीआर

संक्षेप:

बिहार की 59.27 प्रतिशत अपंजीकृत राजनीतिक पार्टियों ने वित्त वर्ष 2023-24 की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में बताया गया है कि 275 पार्टियों में से केवल 25 प्रतिशत ने अपनी ऑडिट और योगदान रिपोर्ट दी, जबकि 32 पार्टियों को नियमों के उल्लंघन के कारण सूची से हटा दिया गया।

Nov 07, 2025 11:01 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, एजेंसी। बिहार से जुड़ी 59.27 प्रतिशत अपंजीकृत राजनीतिक पार्टियों ने वित्त वर्ष 2023-24 की अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इन पार्टियों ने न तो ऑडिट रिपोर्ट जमा की और न ही 20 हजार रुपये से अधिक के दान की जानकारी निर्वाचन आयोग या राज्य निर्वाचन की वेबसाइट पर अपलोड की है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। एडीआर ने कुल ऐसी 275 पार्टियों की जांच की, जिनमें से 184 बिहार और 91 अन्य राज्यों में पंजीकृत हैं। इनमें से 163 पार्टियों ने कोई वित्तीय खुलासा नहीं किया, जबकि 113 पार्टियों ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया था।

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सिर्फ 25 फीसदी ने दी जानकारी रिपोर्ट में बताया गया कि 67 पार्टियों (करीब 25 फीसदी) ने अपनी ऑडिट और योगदान रिपोर्ट दोनों सार्वजनिक कीं। इनका सामूहिक कुल आय-व्यय 85.56 करोड़ रुपये है। सबसे अधिक आय समता पार्टी (दिल्ली में पंजीकृत) की रही, जिसे 53.13 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद 9.59 करोड़ रुपये के साथ सोशालिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) का स्थान रहा। 32 पार्टियों को सूची से हटाया रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आयोग ने अगस्त-सितंबर 2024 में 32 पार्टियों को निष्क्रियता और नियम उल्लंघन के कारण सूची से हटा दिया। इनमें से राष्ट्रीय सर्वोदय पार्टी (बिहार) की पांच साल की कुल आय 10.66 करोड़ रुपये रही, हालांकि उसने कोई चुनाव नहीं लड़ा। बिहार की 28 पंजीकृत अपंजीकृत पार्टियों ने किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। इनकी पांच साल की कुल आय 1.52 करोड़ रुपये रही (वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक)। इनमें सबसे अधिक आय करीब 82 लाख रुपये मिथिलावादी पार्टी की रही। इसके बाद शोषित इंकलाब पार्टी (29.49 लाख) और गणतांत्रिक जनहित पार्टी (21.05 लाख) का स्थान रहा।